छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में जनसंपर्क विभाग की सहायक संचालक नूतन सिदार द्वारा एक पत्रकार को बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के ‘अपराधी’ घोषित कर देना अब राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बन गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी शिकायत को प्रोसेस में डालकर संज्ञान ले लिया है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब जनसंपर्क विभाग के अंशकालीन कर्मचारी रविन्द्रनाथ राम ने आरोप लगाया कि उनसे वर्षों तक झाड़ू-पोछा, बर्तन साफ कराने जैसे निजी काम करवाए गए और 13 अगस्त 2025 को प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। इसी प्रकरण की जांच और ‘फर्जी नियुक्ति’ से जुड़े तथ्य उजागर करने पर स्वतंत्र पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा अधिकारी के निशाने पर आ गए।

2 सितंबर 2025 को नूतन सिदार ने पुलिस को दिए पत्र में पत्रकार को दो बार 'अपराधी' कहा, जिसे उन्होंने कलेक्टर के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में प्रसारित भी किया। संवैधानिक रूप से किसी को ‘अपराधी’ घोषित करने का अधिकार केवल न्यायालय को होता है, ऐसे में अधिकारी के इस कदम ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब पत्रकार को 1 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा गया, साथ ही रायगढ़ डाकघर को रात 8:25 बजे विशेष रूप से खुलवाकर शिकायत भेजे जाने की बात सामने आई। पत्रकार ने इसका जवाब भेजते हुए 50 लाख रुपये हर्जाने की मांग करते हुए अधिकारी से सार्वजनिक माफी मांगी।
RTI में जानकारी मांगने पर थाना एवं संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा विवरण न देने से प्रशासन की भूमिका भी संदेह के दायरे में आ गई।
अब PMO द्वारा दर्ज शिकायत (PMOPG/D/2025/0229404) ‘Under Process’ में है, जिसके बाद पत्रकार ने मांग रखी है कि—
बिना दोष सिद्ध किए ‘अपराधी’ कहने पर अधिकारी पर FIR दर्ज हो,
सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन पर उन्हें पद से हटाया जाए।
यह विवाद अब केवल एक अधिकारी और पत्रकार के बीच का नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अफसरशाही के बीच गंभीर टकराव के रूप में उभर चुका है। अब नजरें इस बात पर हैं कि PMO और राज्य सरकार इस संवेदनशील प्रकरण पर क्या कड़ी कार्रवाई करती है।
