ANP News Live Raipur छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली प्रख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। उन्होंने रायपुर स्थित एम्स (AIIMS) में सुबह लगभग 3:15 बजे अंतिम सांस ली। वे पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थीं और 27 मई से उनका उपचार चल रहा था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक
डॉ. तीजन बाई के निधन की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एम्स रायपुर पहुंचे। उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्भुत कला, समर्पण और प्रभावशाली प्रस्तुति से पंडवानी जैसी लोकगायन परंपरा को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनका जाना छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।
पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाली महान कलाकार
दुर्ग जिले की रहने वाली डॉ. तीजन बाई अपनी दमदार आवाज, जीवंत अभिनय और महाभारत की कथाओं के प्रभावशाली मंचन के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने पंडवानी को गांव की चौपाल से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया और भारतीय लोककला का गौरव बढ़ाया।
देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुई थीं सम्मानित
डॉ. तीजन बाई को भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण सहित कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। उन्होंने अपने पूरे जीवन को लोक संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया।
श्रद्धांजलि देने उमड़े जनप्रतिनिधि
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधि, कलाकार, साहित्यकार और बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक उपस्थित रहे। सभी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को हमेशा याद रखने की बात कही।
लोक संस्कृति में हमेशा जीवित रहेंगी तीजन बाई
डॉ. तीजन बाई का निधन एक युग का अंत माना जा रहा है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पहचान को दुनिया भर में स्थापित किया। उनकी आवाज, उनकी प्रस्तुति और लोक संस्कृति के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
