जी हां हम बात कर रहे है छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला कि जहां से प्रदेश को एक जनजातीय नेतृत्व मिला, उसी लोयोला हिंदी माध्यम स्कूल, कुनकुरी में मानवता को पीछे छोड़ दिया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पूर्व विद्यालय में बारिश में भीगे जूतों के कारण चप्पल पहनकर आए बच्चों को स्कूल के गेट से लौटा दिया गया।
भीगे जूते की जगह चप्पल बनी अपमान की वजह
लगातार हो रही बारिश में बच्चों के जूते गीले हो गए थे। मजबूरीवश वे चप्पल पहनकर पहुंचे, लेकिन प्राचार्य फादर सुशील ने उन्हें प्रवेश नहीं दिया। इससे बच्चों को न सिर्फ शिक्षा से वंचित होना पड़ा, बल्कि उन्हें मानसिक अपमान भी सहना पड़ा।
अभिभावकों का सवाल – क्या गरीबी अब अनुशासनहीनता है?
अभिभावकों का कहना है कि जिस स्कूल ने एक नेता को जन्म दिया, वह आज गरीब बच्चों की स्थिति नहीं समझ पा रहा।
प्राचार्य का पक्ष – अनुशासन सर्वोपरि
प्राचार्य ने ड्रेस कोड का हवाला देते हुए कहा कि विद्यालय अनुशासन से समझौता नहीं कर सकता।
लेकिन सवाल बना है — क्या मानवीय संवेदनाएं ड्रेस कोड से भी छोटी हैं?
शिक्षा विभाग करेगा जांच–
कुनकुरी विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने कहा–मामले की जानकारी मिली है, जांच की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
अब सबकी नजर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर –क्या वे अपने पुराने स्कूल की इस संवेदनहीनता पर चुप रहेंगे? या संवेदनशील नेतृत्व का परिचय देते हुए इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देंगे? यह सिर्फ एक स्कूल का मामला नहीं, एक व्यापक बहस है —क्या आज शिक्षा में संवेदनाएं अनुशासन के नीचे आ चुकी हैं?
