सिंघाली में देश की पहली पेस्ट फिल परियोजना, तकनीक और स्थानीय हितों के संतुलन पर जोर

देश के भूमिगत कोयला खनन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल के रूप में सिंघाली कोयला भूमिगत खदान में पेस्ट फिल परियोजना विकसित की जा रही है। परियोजना को देश में अपनी तरह की पहली पहल बताया जा रहा है। इसके सफल होने पर भूमिगत कोयला खनन में नई तकनीक के उपयोग का अनुभव मिलेगा और भविष्य में बंद अथवा निष्क्रिय भूमिगत खदानों में उपलब्ध कोयला संसाधनों के बेहतर उपयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

परियोजना का कार्य एसईसीएल के अंतर्गत ठेकेदार टीएमसी मिनरल रिसोर्स को दिया गया है। वर्तमान में सिंघाली खदान में कोयला उत्पादन शुरू नहीं हुआ है और परियोजना निर्माण, विकास तथा निवेश के चरण में है। ऐसे में परियोजना को निर्धारित समय-सीमा, तकनीकी मानकों और सुरक्षा नियमों के अनुरूप आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है पेस्ट फिल तकनीक?

पेस्ट फिल तकनीक के तहत भूमिगत खनन के बाद बनने वाले खाली स्थानों को उपयुक्त मिश्रित सामग्री से भरा जाता है। इससे भूमिगत संरचना की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है और भू-धंसान जैसे संभावित जोखिमों को कम करने में सहयोग मिल सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सिंघाली परियोजना का प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में भूमिगत खनन क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों के अधिक प्रभावी और सुरक्षित उपयोग की दिशा में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। यह परियोजना केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय कोयला क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी अनुभव का आधार बन सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं के लिए किए जा रहे कार्य

परियोजना प्रबंधन का कहना है कि खनन विकास कार्यों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। भेजीनारा गांव में पाइपलाइन का कार्य पूरा किया जा चुका है। बारिश के दौरान आवागमन की समस्या को देखते हुए सिंघाली माइन गेट से भेजीनारा तक लगभग 200 मीटर क्षेत्र में अस्थायी सड़क निर्माण एवं सुधार का काम किया जा रहा है।

वहीं लालपुर गांव में ग्रामीणों के नहाने और दैनिक उपयोग के लिए तालाब का उत्खनन पूरा किया जा चुका है तथा पचरी निर्माण का कार्य जारी है। प्रबंधन का कहना है कि परियोजना की जरूरतों के साथ स्थानीय रोजगार, मूलभूत सुविधाओं और ग्रामीणों के आवागमन के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल और सीमांकन

परियोजना क्षेत्र में बाउंड्रीवाल और सीमांकन का निर्माण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। भविष्य में यहां भारी मशीनरी और अन्य उपकरणों का संचालन प्रस्तावित है। ऐसे में खुले क्षेत्र में बच्चों और आम नागरिकों का अनियंत्रित आवागमन दुर्घटना का कारण बन सकता है।

प्रबंधन के अनुसार, बाउंड्रीवाल और गेट की व्यवस्था परियोजना संपत्ति के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। बारिश समाप्त होने के बाद स्थल की परिस्थितियों और प्रशासनिक समन्वय के आधार पर बाईपास अथवा वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की योजना बताई गई है। तब तक आवश्यक आवागमन को ध्यान में रखते हुए दोनों ओर के गेट खुले रखने की व्यवस्था जारी रखने की बात कही गई है।

भूमि और मार्ग विवाद पर दस्तावेजी समाधान की जरूरत

जिस मार्ग को वर्षों पुराना मुख्य मार्ग बताया जा रहा है, उसकी वैधानिक स्थिति राजस्व अभिलेख, एसईसीएल के अधिकृत रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकारी के दस्तावेजों के आधार पर तय होना चाहिए। परियोजना प्रबंधन का कहना है कि भूमि और मार्ग से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान दस्तावेजी जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना आवश्यक है।

प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा निजी हितों को लेकर ग्रामीणों को परियोजना कार्यों के खिलाफ प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। लगभग छह एकड़ भूमि के उपयोग से जुड़ा मुद्दा भी सामने आया है। प्रबंधन के अनुसार, भूमि से संबंधित दावों की जांच अधिग्रहण दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के आधार पर की जानी चाहिए।

हालांकि, किसी भी भूमि विवाद या स्थानीय अधिकार से जुड़े दावे की निष्पक्ष जांच संबंधित प्रशासनिक और सक्षम प्राधिकारियों द्वारा किया जाना आवश्यक है।

संवाद से समाधान की उम्मीद

परियोजना प्रबंधन का कहना है कि ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए प्रशासन तथा संबंधित पक्षों के साथ संवाद का रास्ता खुला है। प्रबंधन की प्राथमिकता परियोजना को तकनीकी, पर्यावरणीय और सुरक्षा मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाने के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा और सुविधाओं का भी ध्यान रखना है।

सिंघाली पेस्ट फिल परियोजना का सफल क्रियान्वयन भविष्य में भूमिगत कोयला खनन और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। ऐसे में परियोजना विकास, पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षा और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाना इसकी सफलता के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता होगी।

 

Related Post