भोगापाल के ऐतिहासिक बौद्ध चैत्यगृह में बुद्ध जयंती धूमधाम से मनाई गई

कोण्डागांव, 13 मई 2025: जिले के सुदूर वनांचल में स्थित भोगापाल ग्राम के प्राचीन और विशाल बौद्ध चैत्यगृह में बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर गौतम बुद्ध जयंती श्रद्धा, शांति और उल्लास के साथ मनाई गई। लसूरा नदी के तट पर स्थित यह ऐतिहासिक स्थल बस्तर अंचल में बौद्ध संस्कृति का प्रमुख केंद्र है, जहां संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा संरक्षित भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा विराजमान है।

 

सैकड़ों श्रद्धालुओं ने की उपस्थिति

12 मई को आयोजित इस समारोह में कोण्डागांव, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, बीजापुर सहित राज्य और देशभर से सैकड़ों बुद्ध अनुयायी पहुंचे। ग्रामवासियों और श्रद्धालुओं ने त्रिशरण और पंचशील का पाठ कर, दीप, पुष्प, खीर और फल अर्पित कर भगवान बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

विधायक ने दी विकास की सौगात

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक नीलकंठ टेकाम थे। उन्होंने घोषणा की कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का भोगापाल दौरा इसी माह प्रस्तावित है, जहां भोगापाल को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने की मांग प्रस्तुत की जाएगी।

 

गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति

समारोह में रायपुर संभाग के कमिश्नर महादेव कावरे, डॉ. कृष्णमूर्ति कांबले, पूर्व इनकम टैक्स कमिश्नर गिरधारी लाल भगत, सर्व अनुसूचित जाति वर्ग के जिला अध्यक्ष धंसराज टंडन, जिला सरपंच संघ अध्यक्ष झाड़ीराम सलाम, बौद्ध समाज अंतागढ़ अध्यक्ष घनश्याम रामटेके, लंजोड़ा अध्यक्ष ममता खापर्डे समेत कई बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

पर्यटन और ध्यान केंद्र की माँग

वक्ताओं ने भोगापाल चैत्यगृह को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन व ध्यान केंद्र के रूप में विकसित करने की माँग की, जिससे क्षेत्र में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और स्थानीय लोगों को भी लाभ हो।

 

भोजन भंडारे से हुआ समापन

ग्रामवासियों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भव्य भोजन भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन अनिल खोबरागड़े ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन बौद्ध समिति भोगापाल के सचिव दिनेश सोरी ने प्रस्तुत किया।

 

पूरे आयोजन का वातावरण शांतिपूर्ण, धार्मिक और प्रेरणादायक रहा, जिससे भोगापाल एक बार फिर बौद्ध श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनकर उभरा।

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