Anp News Live Janjgir Champa प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से राशि जारी की जाती है। इसी योजना के तहत ग्राम पंचायत मुनुद में कुछ आवासों के निर्माण और जियो टैगिंग को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में पुराने और जर्जर मकानों की तस्वीरों को नए आवास के रूप में ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया गया तथा निर्माण के नाम पर सरकारी राशि का आहरण किया गया।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, कुछ हितग्राहियों के आवासों की जमीनी स्थिति और पोर्टल पर दर्ज तस्वीरों के बीच अंतर होने की बात कही जा रही है। मामले में जियो टैगिंग और ऑनलाइन दर्ज जानकारी की भी जांच की मांग उठी है।
पुराने मकानों को नया दिखाने का आरोप
मामले को लेकर आरोप है कि पंचायत स्तर पर कुछ पुराने मकानों को ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित नया मकान बताकर उनकी तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड की गईं। इसके बाद आवास निर्माण की विभिन्न किस्तों के रूप में राशि जारी होने की बात सामने आई है।
कुछ स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि योजना के लाभ के लिए हितग्राहियों से कथित रूप से राशि की मांग की गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जियो टैगिंग की भूमिका पर भी सवाल
प्रधानमंत्री आवास योजना में निर्माण की प्रगति दर्ज करने के लिए जियो टैगिंग और फोटो अपलोड जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग किया जाता है। मुनुद पंचायत में इसी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर सामने आए आरोपों के मुताबिक, ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज तस्वीरों और वास्तविक निर्माण स्थल की स्थिति में अंतर हो सकता है। ऐसे में संबंधित आवासों का भौतिक सत्यापन कर रिकॉर्ड से मिलान किए जाने की जरूरत बताई जा रही है।
जमीन पर तलाशे जाएंगे आवास
मामले में अब प्रशासनिक जांच की बात सामने आई है। जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार पोयाम ने कहा कि ग्रामीण विकास योजनाओं में लापरवाही या धोखाधड़ी के आरोप गंभीर विषय हैं। उन्होंने एक विशेष जिला स्तरीय टीम गठित करने की बात कही है।
यह टीम संदिग्ध निर्माण स्थलों पर जाकर भौतिक सत्यापन करेगी। साथ ही ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज फोटो, जियो टैगिंग और अन्य विवरणों का मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान किया जाएगा।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मुनुद पंचायत में उठे इन सवालों के बाद अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है। यदि जांच में पुराने मकानों को नए आवास के रूप में दर्ज करने, गलत जियो टैगिंग या सरकारी राशि के गलत तरीके से आहरण की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। जांच टीम के भौतिक सत्यापन से यह पता चलेगा कि पोर्टल पर दर्ज आवासों की तस्वीरें और निर्माण संबंधी जानकारी जमीनी स्थिति से कितनी मेल खाती है।
