रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक सिंघनपुर गुफा में शनिवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब रिसर्च कार्य में जुटी वैज्ञानिकों की टीम पर अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। इस घटना में रायपुर स्थित Pandit Ravishankar Shukla University के साइंटिस्ट विभाग की पांच सदस्यीय टीम गंभीर रूप से घायल हो गई। घायलों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए रायगढ़ के जिंदल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्राचीन शैलचित्रों के अध्ययन के दौरान हुआ हमला
जानकारी के अनुसार भूपदेवपुर थाना क्षेत्र में स्थित सिंघनपुर गुफा अपने प्राचीन शैलचित्रों और पाषाणकालीन अवशेषों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां समय-समय पर पुरातत्व और इतिहास से जुड़ी रिसर्च टीमें अध्ययन के लिए पहुंचती रहती हैं।
शनिवार को रायपुर के रविशंकर विश्वविद्यालय के साइंटिस्ट विभाग की पांच सदस्यीय टीम गुफा और आसपास मौजूद पुरातात्विक स्थलों का अध्ययन करने पहुंची थी। टीम पहाड़ी पर चढ़कर गुफा के भीतर प्राचीन शैलचित्रों और पाषाणकालीन संरचनाओं का निरीक्षण कर रही थी। इसी दौरान दोपहर करीब तीन बजे अचानक मधुमक्खियों के बड़े झुंड ने टीम पर हमला कर दिया।
जान बचाकर गुफा से बाहर निकले वैज्ञानिक
अचानक हुए हमले से टीम में अफरा-तफरी मच गई। मधुमक्खियों के लगातार डंक मारने से सभी सदस्य बुरी तरह घायल हो गए। किसी तरह जान बचाते हुए सभी सदस्य गुफा से बाहर निकले और तत्काल इसकी सूचना भूपदेवपुर पुलिस तथा वन विभाग को दी।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वहीं आसपास के ग्रामीण भी सहायता के लिए घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तत्काल रायगढ़ स्थित जिंदल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
शरीर में सूजन और तेज दर्द से बिगड़ी हालत
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार मधुमक्खियों के हमले के बाद घायलों के शरीर में तेज सूजन और असहनीय दर्द होने लगा था, जिससे मौके पर भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। हालांकि डॉक्टरों की निगरानी में अब सभी की स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन शरीर में कई जगह डंक फंसे होने के कारण उन्हें अब भी काफी तकलीफ हो रही है।
शोधकर्ताओं के लिए चुनौती बना जंगल क्षेत्र
सिंघनपुर गुफा क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां प्राचीन शैलचित्रों और पुरातात्विक धरोहरों के अध्ययन के लिए अक्सर विशेषज्ञ और शोधकर्ता पहुंचते हैं। लेकिन प्राकृतिक परिस्थितियों और वन्य वातावरण के कारण यहां रिसर्च कार्य जोखिम भरा भी माना जाता है।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और वन विभाग द्वारा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सावधानी को लेकर अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
