नगर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों महिलाओं एवं कन्याओं ने सहभागिता की
पारंपरिक वेशभूषा में सजी कन्याओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर नगर भ्रमण किया
बैंड-बाजों की मधुर धुनों के बीच प्रस्तुत दांडी नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा
अवास कैवर्त/ जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही
मरवाही। अखिल विश्व गायत्री परिवार (शाखा मरवाही) के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय 'युग परिवर्तन श्रीमद् भागवत ज्ञान महायज्ञ' का गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच भव्य शुभारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ प्रारंभ हुए इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। पूरे आयोजन स्थल पर भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर निकाली गई भव्य कलश यात्रा कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। पीतांबर एवं पारंपरिक वेशभूषा में सजी सैकड़ों महिलाओं और कन्याओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर नगर भ्रमण किया। बैंड-बाजों की मधुर धुनों और जयघोष के बीच निकली इस यात्रा ने पूरे नगर को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। यात्रा के दौरान कन्याओं द्वारा प्रस्तुत मनमोहक दांडी नृत्य ने उपस्थित लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया तथा श्रद्धालुओं ने धर्म एवं संस्कृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
आयोजन के प्रथम दिवस विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, संस्कार निर्माण तथा युग परिवर्तन की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए समाज में सकारात्मक सोच और जनजागरण की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने हवन, पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
महायज्ञ में बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के कार्यकर्ता, परिजन, ग्रामीणजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन स्थल पर दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और लोगों में कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया।
आयोजन समिति के अनुसार महायज्ञ के द्वितीय दिवस से योग, संगीत एवं डफली प्रशिक्षण की विशेष कक्षाएं भी प्रारंभ कर दी गई हैं। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं एवं आमजन को भारतीय संस्कृति, स्वास्थ्य और संगीत से जोड़ना है। समिति ने बताया कि आगामी सात दिनों तक प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन, यज्ञ, संस्कार सत्र, योग प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
गायत्री परिवार द्वारा आयोजित यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक जागरण, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश भी दे रहा है। आयोजन को लेकर क्षेत्रवासियों में भारी उत्साह है तथा प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
