रायगढ़। श्री जगन्नाथ रथोत्सव-2026 को लेकर शहर में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस बार का रथोत्सव कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। पहली बार रायगढ़ में जगन्नाथ मंदिर, पुरी के पावन रोषाघर (रसोई) से जुड़े सेवायत भगवान श्री जगन्नाथ के लिए पारंपरिक एवं शास्त्रोक्त विधि से छप्पन भोग महाप्रसाद तैयार करेंगे। इससे श्रद्धालुओं को पुरी की प्राचीन परंपरा का दिव्य अनुभव प्राप्त होगा।
14 जून को हुई बैठक, तैयारियों को अंतिम रूप
श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट की बैठक में रथोत्सव से जुड़े सभी धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यवस्थागत कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई। ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति एवं विभिन्न सहायक समितियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
29 जून से शुरू होगा धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला
रथोत्सव की शुरुआत 29 जून (देवस्नान पूर्णिमा) से होगी। इस दिन भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा का दिव्य महा स्नान कराया जाएगा। इसके बाद विशाल महाप्रसाद भंडारा आयोजित होगा, जिसमें पुरी के सेवायतों द्वारा तैयार छप्पन भोग श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप मिलेगा। शाम को ओडिसी नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।
देवस्नान के बाद महाप्रभु 15 दिनों तक अनसर गृह में विराजमान रहेंगे। 14 जुलाई को नेत्रोत्सव एवं नवयौवन दर्शन के अवसर पर श्रद्धालु महाप्रभु के प्रथम दर्शन कर सकेंगे।
16 जुलाई को छेरा पहरा, 17 जुलाई को निकलेगी रथयात्रा
16 जुलाई को पारंपरिक पहंडी विजे और रायगढ़ राजपरिवार द्वारा निभाई जाने वाली छेरा पहरा की ऐतिहासिक परंपरा के साथ रथोत्सव का शुभारंभ होगा। इसके अगले दिन 17 जुलाई को रथयात्रा मोतीमहल से निकलकर चांदनी चौक, सोनारपारा होते हुए गांजा चौक स्थित मौसी घर पहुंचेगी।
वहीं 24 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा (वापसी रथयात्रा) के साथ भगवान पुनः श्री जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे।
25 जुलाई को सोनाभेष के साथ होगा समापन
रथोत्सव का समापन 25 जुलाई (हरिशयन एकादशी) को भव्य सोनाभेष के साथ होगा। इस अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ का स्वर्णाभूषणों और पाट वस्त्रों से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। परंपरा के अनुसार इस दिन केवल रसगुल्ले का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। इसी के साथ भगवान चार माह के शयन काल में प्रवेश करेंगे।
श्रद्धालुओं से सहभागिता की अपील
बैठक में वक्ताओं ने हरिशयन एकादशी से देवउठनी एकादशी तक के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं से सभी आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। जानकारी उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति के मीडिया प्रभारी आकाश कुमार मिश्रा (अधिवक्ता) ने दी।
