जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत मुनुद में प्रधानमंत्री आवास योजना के कथित महाघोटाले ने नया मोड़ ले लिया है। गांव में आरोप है कि सात सदस्यीय जांच दल के पहुंचने से पहले पुराने मकानों की रंगाई-पोताई कराकर गड़बड़ियों को छिपाने की कोशिश की जा रही है। मामले में पहले से फर्जी जियो-टैगिंग और बिना निर्माण के मकानों को पोर्टल पर पूर्ण दिखाकर राशि निकाले जाने के आरोप लगे हैं।
जांच की भनक लगते ही गांव में बढ़ी हलचल
सूत्रों के मुताबिक, जिला प्रशासन द्वारा सात सदस्यीय हाई-प्रोफाइल जांच समिति गठित किए जाने और सात दिनों के भीतर भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट देने के निर्देश के बाद पंचायत में हलचल तेज हो गई। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी और कुछ बिचौलिए हितग्राहियों पर पुराने मकानों की रंगाई-पोताई कराने का दबाव बना रहे हैं, ताकि जांच टीम के सामने यह दिखाया जा सके कि सरकारी राशि का उपयोग आवास निर्माण में किया गया है।
पुराने मकानों का कराया जा रहा मेकओवर
ग्रामीणों के मुताबिक, जिन मकानों का प्रधानमंत्री आवास योजना से कोई वास्तविक निर्माण नहीं हुआ, उन्हें पेंट कराकर नया जैसा दिखाने की कोशिश की जा रही है। आरोप है कि इसका उद्देश्य जांच टीम को गुमराह करना और कथित गड़बड़ियों को तकनीकी त्रुटि बताकर कार्रवाई से बचना है।
धरातल पर निर्माण नहीं, पोर्टल पर मकान पूर्ण
शिकायत में दावा किया गया है कि कई मामलों में जमीन पर मकान बने ही नहीं, लेकिन विभागीय पोर्टल पर फर्जी जियो-टैगिंग के जरिए तस्वीरें अपलोड कर मकानों को पूर्ण दिखा दिया गया। इसके बाद कथित रूप से पूरी सरकारी राशि का आहरण भी कर लिया गया।
सात सदस्यीय जांच दल करेगा भौतिक सत्यापन
कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच दल को प्रभावित स्थलों का भौतिक सत्यापन करने, पोर्टल पर अपलोड तस्वीरों का मौके की स्थिति से मिलान करने और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।
गुमराह करने की कोशिश पर बढ़ सकती है मुश्किल
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि जांच के दौरान दस्तावेजों में हेरफेर, फर्जीवाड़ा या जांच को प्रभावित करने की कोशिश साबित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, किन धाराओं में मामला दर्ज होगा, यह जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सात सदस्यीय जांच दल मौके पर कथित रंगाई-पोताई और फर्जी जियो-टैगिंग की सच्चाई सामने ला पाता है या नहीं। फिलहाल पूरे मामले पर ग्रामीणों और प्रशासन
की नजर बनी हुई है।
