जगद्गुरु रामाभद्राचार्य का श्रीराम कथा कोरबा के हसदेव नदी के तट पर हो रही है।
रामभद्राचार्य जी का नाम बहुत ही आदर के साथ हिन्दू संत समाज में लिया जाता है। धर्मचक्रवर्ती, तुलसीपीठ के संस्थापक, पद्मविभूषण, जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी वही हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में रामलला के पक्ष में वेद पुराण के उद्धारण के साथ गवाही दी थी।
उनके बारे में यह बातें सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल हो रही है कि जब श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में वे वादी के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने ऋग्वेद की जैमिनीय संहिता से उद्धरण देना शुरू किया जिसमें सरयू नदी के स्थान विशेष से दिशा और दूरी का बिल्कुल सटीक ब्यौरा देते हुए श्रीराम जन्मभूमि की स्थिति बताई गई है।
कोर्ट के आदेश से जैमिनीय संहिता मंगाई गई...और उसमें जगद्गुरु जी द्वारा निर्दिष्ट संख्या को खोलकर देखा गया और समस्त विवरण सही पाए गए...जिस स्थान पर श्रीराम जन्मभूमि की स्थिति बताई गई है...विवादित स्थल ठीक उसी स्थान पर है...और जगद्गुरु जी के वक्तव्य ने फैसले का रुख मोड़ दिया। जज ने भी स्वीकार किया- आज मैंने भारतीय प्रज्ञा का चमत्कार देखा...एक व्यक्ति जो भौतिक रूप से आंखों से रहित है, कैसे वेदों और शास्त्रों के विशाल वाङ्मय से उद्धरण दिए जा रहे थे? यह ईश्वरीय शक्ति नहीं तो और क्या है? सिर्फ दो माह की उम्र में जगद्गुरु रामभद्राचार्य की आंखों की रोशनी चली गई, आज उन्हें 22 भाषाएं आती हैं, 80 ग्रंथों की रचना कर चुके हैं। पद्मविभूषण रामभद्राचार्यजी एक ऐसे संन्यासी हैं जो अपनी दिव्यांगता को हराकर जगद्गुरु बने।
माता भवानी मंदिर परिसर से लगे हुए मानस मंदिर का उद्घाटन प्राणप्रतिष्ठा कर सनातन धर्म के प्रचार प्रसार करते हुए कहा कि धर्मांतरण के सख्त विरोधी है वे सदा ही धर्म परिवर्तन के खिलाफ रहे है। मानस मन्दिर जो की पूरी श्री राम चरित मानस को मंदिर के दीवारों पे संगमरमर जी पत्थरो से अंकित किया गया है।
यह मंदिर अपने आप मे एक अलग आस्था को बिखेरती है।मंदिर के अंदर एक तरफ तुलसीदास की और दूसरी तरफ मीरा बाई के प्रतिमा को लगाया गया है।बीच मे माता कौशल्या अपने गोद मे भगवान राम को उठाये हुए है।साथ मे बजरंग बली भी बिराजमान है।
मंदिर के निकष द्वार पर राम लाल की भव्य प्रतिमा बना हुआ है।सभी खंभो में अनेको देवी देवताओं के चित्र को लाईट के माध्यम से सूंदर लगा उच्चप्रदर्शित किया गया है।
दर्री स्थित मां भवानी मंदिर के बगल भव्य पंडाल में आयोजित कार्यक्रम में रोजाना भीड़ हजारों की संख्या में लोग कथा के लाभ लेने पहुंच रहे है।
उन क्षेत्र जोगिया डेरा नाम से जाना जाता था जिसे बदल कर माता कौशल्या धाम कर मुझे मेरी दक्षिणा देने की बात कही थी।जिसे कार्यक्रम आये कोरबा नगर निगम के महापौर संजु देवी राजपूत ने तुरंत स्वीकारा और कहा मैं आज से माता कौशल्या धाम के नाम से पारित करती हूँ।बाँकी कागजी कारवाही अगले एम आई सी के बैठक में कर दूंगी।
आचर्य ने भगवान राम जी ननिहाल चंद्रखुरी को भी चंद्रपुरी करवाने की बात कही।
