श्रावण मास का शुभारंभ 11 जुलाई 2025 से हो चुका है, जो 09 अगस्त 2025 तक रहेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा ने श्रावण मास में आहार-विहार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वर्षा ऋतु में वात दोष का प्रकोप अधिक होता है, जिससे हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसे में खान-पान और जीवनशैली में बदलाव जरूरी है।
श्रावण में किन चीजों से बचें–
डॉ. शर्मा ने कहा कि श्रावण मास में हरी पत्तेदार सब्जियाँ, बैंगन, मशरूम, उड़द, मसूर, आलू, अरबी, कटहल, दूध-दही और बासी भोजन से परहेज करें। ये पचने में भारी होते हैं और पेट व त्वचा संबंधी रोग उत्पन्न कर सकते हैं।
क्या खाएं इस मास में
इस दौरान लौकी, परवल, तरोई, मूंग, खिचड़ी, अदरक, जीरा, मैथी, लहसुन, पुराना चावल, जौ, गेहूं जैसे सुपाच्य और वातशामक पदार्थों का सेवन करना चाहिए। हरड़ (हरीतकी) का सेवन विशेष लाभकारी है — यह पाचन को सुधारता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
जीवनशैली कैसी हो श्रावण में–
शरीर की तेल से मालिश (अभ्यंग) करें।
स्वच्छ, हल्के और सूखे वस्त्र पहनें।
सीलन या नमी वाली जगह पर न रहें।
भीगने से बचें, भीगने पर तुरंत कपड़े बदलें।
नंगे पैर गीली मिट्टी में चलने से बचें।
संशोधित, उबला हुआ पानी पिएं।
इनसे बचें–
दिन में सोना, अधिक व्यायाम, देर रात तक जागना, अधिक धूप में रहना, खुली जगह में सोना और बिना शुद्ध जलाशयों में स्नान करना वर्जित बताया गया है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि श्रावण मास में आयुर्वेदिक दिनचर्या अपनाकर हम न केवल मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रह सकते हैं।
श्रावण मास में सात्विक आहार और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर हम ऋतु परिवर्तन में होने वाले रोगों से बच सकते हैं। डॉ. शर्मा के अनुसार – स्वस्थ शरीर, स्वस्थ आहार और संयमित दिनचर्या से ही आयुर्वेद का उद्देश्य पूर्ण होता है।
