कार्बन फैक्ट्री पर गंभीर आरोप, प्रदूषण व श्रमिक शोषण को लेकर फैक्ट्री बंद करने की मांग

कोरबा। जिले के ग्राम गोढ़ी में संचालित वेस्टर्न कोक प्रोडक्ट्स (कार्बन फैक्ट्री) एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने फैक्ट्री प्रबंधन पर पर्यावरण प्रदूषण फैलाने, श्रमिकों के शोषण और औद्योगिक दुर्घटनाओं को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने जिला प्रशासन से फैक्ट्री के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए उसे बंद करने की मांग की है।

 

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का आरोप है कि ग्राम गोढ़ी में श्री सुभाष अग्रवाल एवं श्री अंकुश अग्रवाल द्वारा संचालित यह कार्बन फैक्ट्री लंबे समय से नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रही है। फैक्ट्री से निकलने वाला धुआँ, धूल और अपशिष्ट आसपास के गांवों में प्रदूषण फैला रहा है, जिससे ग्रामीणों में सांस, त्वचा एवं अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। इसके साथ ही कृषि भूमि, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, जंगल तथा जलस्रोत भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

 

पार्टी ने फैक्ट्री में कार्यरत मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार का भी आरोप लगाया है। बताया गया कि बेरोजगार युवकों को रोजगार का झांसा देकर बुलाया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें जातिसूचक गाली-गलौज, अपमान, मारपीट और कम मजदूरी का सामना करना पड़ता है। कई मजदूरों को पूरी मजदूरी नहीं दी जाती और मनमाने ढंग से नौकरी से निकाल दिया जाता है, जो श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है।

 

सबसे गंभीर मामला ग्राम कदमझरिया (ग्राम पंचायत गढ़उपरोड़ा) निवासी 17 वर्षीय संतोष कुमार कोरवा का बताया गया है। वर्ष 2022-23 में फैक्ट्री में काम करने के दौरान सुरक्षा उपकरणों के अभाव में कार्बन प्लास्टिक मशीन में उनका दायां हाथ फंस गया, जिससे उनका हाथ कट गया। संतोष अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। इस दुर्घटना के बाद से उनका परिवार आर्थिक तंगी और गंभीर सामाजिक संकट से जूझ रहा है।

 

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने बताया कि फैक्ट्री के खिलाफ पूर्व में भी कई शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं हुई है। पार्टी ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, प्रदूषण नियंत्रण और श्रम कानूनों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा जनहित को देखते हुए फैक्ट्री को तत्काल बंद किया जाए।

 

पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण आंदोलन, प्रदर्शन और फैक्ट्री में ताला बंदी की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी

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