छुरिया। विकासखंड के ग्राम पंचायत जैतगुंडरा में पिछले डेढ़ साल से आदिवासी भवन का निर्माण हो रहा है जिसके लिये पूर्व की कांग्रेस सरकार की तरफ से 50 लाख रूपये की स्वीकृति मिली थी। लेकिन आज तक उस आदिवासी भवन के निर्माण में कोई उपलब्धि दिखाई नहीं दे रही है। इस कार्य को करने वाले ठेकेदार का कोई पता नहीं चल सका है।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस भवन को बनाने के लिये आरईएस विभाग की अपनी देखरेख में कार्य करवा रहा है। ठेकेदार के नाम पर ठेका लेकर इसे जनपद में कार्यरत एक संविदा कर्मचारी के द्वारा इस कार्य को कर रहा है। सारी आवश्यक निर्माण सामाग्री एवं अन्य सभी खर्च इसी संविदा कर्मचारी के अनुसार हो रहा है। इस संविदा कर्मचारी का ड्यूटी जनपद छुरिया में मनरेगा विभाग को देखने और सम्हालने की है और इस कर्मचारी द्वारा अपनी मनरेगा की ड्यूटी को छोड़कर आदिवासी भवन के निर्माण की ठेकेदारी करने का कौन सा जुनून चढ़ा है। इसका कोई कारण किसी को समझ में नहीं आ रहा है। यह ता ठीक है मनरेगा विभाग का कर्मचारी ठेकेदारी भी कर रहा है लेकिन निर्माण स्थल पर किसी भी प्रकार का कोई सूचना पटल नहीं लगा है आखिर ये क्या बात है क्योंकि ड़ेढ़ साल बीत जाने के बाद भी निर्माण को लेकर कार्यस्थल किसी प्रकार की जानकारी नहीं दिख रही है जबकि एक सूचना पटल बना जरूर है लेकिन वह भी अधूरा सा ही दिख रहा है क्योंकि उसके ऊपर लिखा कुछ भी नहीं है।
यहां सवाल यह उठता है कि इस निर्माण का का ठेका किस ठेकेदार को मिला और कैसे मिला यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है और न ही इस भवन के निर्माण की समय सीमा का कहीं उल्लेख मिल रहा है आखिर ये आदिवासी भवन कब पूर्ण होगा। ठेकेदार ने ठेका लिया तो जनपद के एक मनरेगा से संबंधित कर्मचारी के द्वारा इसके निर्माण पूर्ण सहयोग क्यों लिया जा रहा है।
इस निर्माण कार्य की जानकारी जब सभी उच्चाधिकारियों को है तो अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई इस बात के जवाब में सीईओ जनपद पंचायत छुरिया होरी लाल साहू ने कहा कि उन्हें जनपद के संविदा कर्मचारी द्वारा अपने क्षेत्र को छोड़कर दूसरे क्षेत्र में अपना कार्य करने और ठेकेदारी में समय देने की जानकारी मिली है जिसकी जानकारी अपने बड़े अधिकारियों को देंगे और दोषी पाये जाने पर इस कर्मचारी पर विभागीय कार्यवाही की जायेगी।
