आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ ने राज्य सरकार और बिजली विभाग पर आम जनता के साथ सौतेला व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी के जिला अध्यक्ष ज़फ़र खान ने कहा कि सरप्लस बिजली उत्पादन वाले राज्य में प्रीपेड स्मार्ट मीटर के जरिए गरीबों के कनेक्शन काटे जा रहे हैं, जबकि करोड़ों के बकायेदार पूंजीपतियों और सरकारी विभागों को खुली छूट दी जा रही है।
ज़फ़र खान ने कहा कि जनता द्वारा चुनी गई सरकार का नैतिक दायित्व है कि वह शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करे, लेकिन वर्तमान सरकार जनता के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां आम उपभोक्ताओं के सैकड़ों रुपये बकाया होने पर बिना समय दिए कनेक्शन काट दिए जाते हैं, वहीं 5767 पूंजीपतियों से 119 करोड़ रुपये और 34 सरकारी विभागों से करीब 3100 करोड़ रुपये का बकाया वसूलने में सरकार पूरी तरह विफल रही है।
उन्होंने बिजली विभाग की निविदा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आपातकालीन कार्यों और नए कनेक्शनों के टेंडर नियम अचानक बदल दिए गए हैं। पहले जहां ऑनलाइन निविदाओं में -25 से -30 प्रतिशत तक की दरों पर काम होता था, अब उसे -5 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है। इससे वर्षों से गिने-चुने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है और विभाग को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
ज़फ़र खान ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनी खुद को घाटे में बताकर जनता को दी जाने वाली सब्सिडी खत्म कर रही है, लेकिन बड़े बकायेदारों से राशि वसूलने में कोई सख्ती नहीं दिखा रही। उन्होंने कहा कि यह साफ दर्शाता है कि घाटे के लिए विभाग की लापरवाही जिम्मेदार है, जिसका बोझ महंगी बिजली और कनेक्शन काटने के रूप में जनता पर डाला जा रहा है।
आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि जनविरोधी फैसले और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने वाली निविदा व्यवस्था वापस नहीं ली गई, तो पार्टी पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन करेगी।
