कोरबा/करतला ब्लॉक के रामपुर मुख्य मार्ग पर सड़क मरम्मत कार्य में नाबालिग बच्चों से कराई जा रही मजदूरी का मामला सामने आते ही प्रशासन हरकत में आ गया। खबर प्रकाशित होने के मात्र आधे घंटे के भीतर महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल संरक्षण इकाई की टीम मौके पर पहुंच गई और तत्काल जांच-पड़ताल शुरू कर दी।
घटना करतला–रामपुर मुख्य मार्ग की है, जहां गड्ढों से जर्जर हो चुकी सड़क की मरम्मत के लिए डामरीकरण के साथ-साथ सीमेंट-कंक्रीट की परत बिछाई जा रही थी। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस काम में नाबालिग बच्चों से श्रम कराया जा रहा था, जो पूरी तरह गैरकानूनी और अमानवीय है।
खबर का असर पहुंचे टीम, की गई त्वरित कार्यवाही
जैसे ही यह खबर स्थानीय मीडिया में प्रकाशित हुई, महिला एवं बाल विकास परियोजना करतला की अधिकारी श्रीमती रागिनी बैस ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "आपके माध्यम से हमें इस मामले की जानकारी प्राप्त हुई है। हम तत्काल इस पर कार्रवाई कर रहे हैं।"
बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना कानूनन अपराध है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को भी खतरनाक कार्यों से दूर रखने का प्रावधान है। इस कानून के उल्लंघन की स्थिति में सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
मौके पर पहुंचे टीम / पत्रकारिता जनहित के माध्यम
कोरबा बाल संरक्षण इकाई की टीम ने मौके पर पहुंचकर बच्चों से पूछताछ की और काम करा रहे ठेकेदार से भी जानकारी जुटाई। मिली जानकारी के अनुसार, जिम्मेदारों के खिलाफ रिपोर्ट तैयार की जा रही है और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि पत्रकारिता जनहित के लिए कितना सशक्त माध्यम बन रहा है। इस त्वरित कार्रवाई से एक मजबूत संदेश गया है, कि नाबालिगों का शोषण अब बर्दाश्त
नहीं किया जाएगा।
