कोरबा। क्षेत्र में प्रतिदिन कई दर्जनों ट्रैक्टर रेत लेकर गुजरते हैं, लेकिन इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है और नदी घाटों की प्राकृतिक संरचना भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। प्रतिबंधित अवधि में भी जमकर चला है अवैध रेत का कारोबार, वर्तमान में रेती की जरूरत हर किसी को है। बहुत सारे हितग्राही है जिनको प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ है उनके लिए भी रेती बहुत जरूरी है। क्योंकि उनको बार-बार चौपाल के माध्यम से बोला जा रहा है कि अपना प्रधानमंत्री आवास पूर्ण करो। ऐसे में ट्रैक्टर मालिकों द्वारा उनको रेत उपलब्ध कराया गया। लेकिन कहीं ना कहीं रॉयल्टी नहीं लेना सरकारी राजस्व को हानि पहुंचता है ट्रैक्टर मालिकों का भी जिम्मेदारी बनता है कि सरकार को भी सरकारी राजस्व का लाभ पहुंचाएं।
कोरबा जिले के उरगा क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न रेत घाटों से बिना रॉयल्टी के रेत का अवैध परिवहन खुलेआम जारी है। भैसामुड़ा, तरदा, चिचोली, कटबितला रेत घाटों से दिन-रात रेत की निकासी की जा रही है। बिना किसी प्रशासनिक भय के चल रहे इस कारोबार में स्थानीय रेत माफियाओं की सक्रियता साफ नजर आ रही है।
जांच के दौरान जब रेत लाने वाले ट्रैक्टर चालकों से बात की गई तो उन्होंने कई चौंकाने वाले खुलासे किए।
एक चालक राहुल ने बताया, “हम रेत भैसामुड़ा घाट से लाते हैं, लेकिन वाहन मालिक कौन हैं, इसकी जानकारी नहीं है। हम तो केवल गाड़ी चलाते हैं, जैसा कहा जाता है, वैसा करते हैं।”
वहीं दूसरे चालक दीपक ने बताया कि उनका ट्रैक्टर तिलकेजा निवासी संतोष अग्रवाल का है, जबकि एक अन्य चालक दीपक ने अपने ट्रैक्टर के मालिक का नाम चंदन राजपूत (भैसामुड़ा निवासी) बताया।
इसी तरह मड़वारानी निवासी चालक हीरालाल ने स्वीकार किया कि वे भी भैसामुड़ा से रॉयल्टी रहित रेत लेकर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारा ट्रैक्टर संजय पटेल (मड़वारानी निवासी) का है। खनिज विभाग और पुलिस से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि महीने में ‘पैसा पटाया जाता है’। कितना पैसा दिया जाता है, ये हमारे सेट जानेंगे, वही जो बुलेट मोटरसाइकिल में आते हैं, उन्हें ही भुगतान किया जाता है ताकि रेत का परिवहन बिना रोक-टोक जारी रह सके।
