खरीफ सीजन की दस्तक के साथ कोरबा जिले के गांवों में खेती-किसानी का जोश चरम पर है। खेतों में ट्रैक्टर की गूंज, मजदूरों की चहल-पहल और किसानों के चेहरों पर उम्मीद की चमक — यह सब इस बात का संकेत है कि इस बार उत्पादन को लेकर वे बेहद आशान्वित हैं।
इस उत्साह के पीछे सबसे बड़ी वजह है सहकारी समितियों में खाद और बीज की समय पर, पर्याप्त और रियायती दरों पर उपलब्धता। किसान अब लंबी कतारों या महंगे दामों की परेशानी से मुक्त हो चुके हैं।
करतला की सहकारी समिति में खाद-बीज लेने पहुंचे बांधापाली गांव के किसान मानकुमार ने बताया कि उन्हें बिना किसी अव्यवस्था के यूरिया, एनपीके और सुपर फॉस्फेट जैसे उर्वरक समय पर मिल गए। उन्होंने कहा कि "हम जैसे छोटे किसानों के लिए यही सबसे बड़ी मदद है।"
मानकुमार ने बताया कि उन्होंने 10 एकड़ भूमि पर धान की फसल की योजना बनाई है। खेतों की जुताई पूरी हो चुकी है और हाल की झमाझम बारिश के साथ मजदूर रोपा लगाने में जुट गए हैं।
उन्होंने सहकारी समिति से प्राप्त खाद-बीज की गुणवत्ता और सहज आपूर्ति को ‘अभूतपूर्व’ बताया और उम्मीद जताई कि इस बार पैदावार अच्छी होगी।
