मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में पत्रकारों पर नोटिस थोपने और मानहानि की कार्रवाई की धमकी को लेकर बुधवार को जिलेभर के पत्रकार संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। बड़ी संख्या में पत्रकार ज़िला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
पत्रकारों ने जनसंपर्क विभाग की सहायक संचालक नूतन सिदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अधीनस्थ कर्मचारियों के माध्यम से पत्रकारों को करोड़ों रुपये की मानहानि नोटिस भेजी है। इसे पत्रकारों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया।

ज्ञापन में उठाए गए आरोप
1. पत्रकारों को मानहानि नोटिस भेजकर अपमानित किया गया।
2. जिला प्रशासन की चुप्पी संदिग्ध और दुर्भाग्यपूर्ण है।
3. विभागीय अधिकारी षड्यंत्र के तहत कार्रवाई कर रहे हैं।
4. मुख्यमंत्री और संवाद प्रमुख को गुमराह किया गया।
5. पत्रकारों को अपराधी की तरह प्रस्तुत करने की कोशिश की गई।
पत्रकारों की प्रमुख मांगें
नूतन सिदार के खिलाफ अपराध दर्ज कर सेवा से बर्खास्त किया जाए।
उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच हो।
शासन यह स्पष्ट करे कि पत्रकारों को धमकाने का आदेश किस दबाव में दिया गया।
जनसंपर्क विभाग में सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
आंदोलन की चेतावनी
पत्रकारों ने साफ कहा कि यह लड़ाई केवल जशपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ी है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्यभर के पत्रकार उग्र आंदोलन करेंगे।
पत्रकारों की एकजुटता
ज्ञापन पर बड़ी संख्या में वरिष्ठ और युवा पत्रकारों के हस्ताक्षर हुए। इसने स्पष्ट कर दिया है कि पत्रकार समुदाय इसे अपनी प्रतिष्ठा और अस्तित्व की लड़ाई मान रहा है।
यह मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में भी हलचल मचाने वाला है, क्योंकि यह सीधे मुख्यमंत्री के गृह जिले से जुड़ा हुआ है।
