बालको के किसान मेले में उमड़ा नवाचार का संगम, 750 से अधिक किसानों को मिली आधुनिक खेती की दिशा

किसानों को आधुनिक खेती, सतत आजीविका और नवीन कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) द्वारा किसान दिवस के अवसर पर बेला एवं सोनगुढ़ा गांव में किसान मेला-2025 का आयोजन किया गया। इस मेले में जिले के 40 गांवों से आए 750 से अधिक किसानों ने सक्रिय सहभागिता की।

वेदांता समूह की कंपनी बालको द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में तकनीकी विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, बैंक प्रतिनिधियों और कृषि उद्यमियों ने किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी। यह आयोजन बायफ, सतत आजीविका एवं विकास संस्थान के सहयोग से संपन्न हुआ।

मेले में कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और फसल बीमा से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। बालको की ‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना के अंतर्गत वितरित कृषि उपकरणों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। नकटीखार स्थित हाई-टेक नर्सरी से जुड़े स्टॉल में किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधों की जानकारी दी गई।

किसान उत्पादक संगठन (FPO) के स्टॉल के माध्यम से समूह आधारित खेती और बाजार से सीधा जुड़ाव करने के लाभ समझाए गए। वहीं मारुत ड्रोन, क्रॉम्पटन मोटर, बिड़ला पाइप तथा कृषि व उद्यानिकी विभाग के स्टॉल्स पर आधुनिक उपकरण, सिंचाई समाधान, सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि किसानों की भूमिका देश की खाद्य सुरक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। बालको किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आय के नए अवसर सृजित करने पर लगातार कार्य कर रहा है। ‘मोर जल मोर माटी’ जैसी पहल से खेती को लाभकारी आजीविका के रूप में विकसित किया जा रहा है।

रोगबहरी गांव के किसान अर्जुन कंवर ने बताया कि बालको से मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से उनकी खेती में सकारात्मक बदलाव आया है। बेहतर उत्पादन और लागत में कमी से उन्हें न सिर्फ आर्थिक लाभ मिला, बल्कि सम्मान प्राप्त कर अन्य किसानों को प्रेरित करने का अवसर भी मिला।

बालको की ‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना अब तक 3,200 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 8,000 से ज्यादा किसानों तक पहुंच चुकी है। इनमें से 6,000 से अधिक किसानों ने आधुनिक खेती के तरीके अपनाए हैं, जिससे उनकी आय और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। परियोजना से जुड़े लगभग 25 प्रतिशत किसान युवा हैं, जो कृषि को एक सशक्त आजीविका के रूप में अपनाने का संकेत देते हैं।

इस पहल के माध्यम से बालको सरकारी योजनाओं और संस्थागत सहयोग के जरिए ग्रामीण आजीविका को मजबूत कर रहा है और छत्तीसगढ़ में टिकाऊ कृषि विकास को नई दिशा दे रहा है।

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