
सांप या जहरीले जीव के काटने से मौत पर सरकारी सहायता राशि में कथित धोखाधड़ी का मामला, जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने 8 मामलों में दी जमानत
बिलासपुर से विशु तिवारी की खास रिपोर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से सरकारी सहायता राशि में कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी हीरा प्रसाद खांडेकर को बड़ी राहत मिली है। सांप या अन्य जहरीले जीव के काटने से मौत के मामलों में सरकारी सहायता राशि प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड तैयार करने से जुड़े प्रकरणों में आरोपी की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली गई है। जानकारी के अनुसार, जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने आठ प्रकरणों में, जबकि न्यायमूर्ति पी.पी. साहू ने दो प्रकरणों में नियमित जमानत प्रदान की है। इस तरह कुल दस प्रकरणों में आरोपी को जमानत मिल गई है।
चार लाख रुपये की सहायता राशि में धोखाधड़ी का आरोप
अभियोजन के अनुसार, बिलासपुर तहसीलदार कार्यालय में पदस्थ नायब नाजिर ग्रेड-दो दौलत राम ठाकुर की शिकायत पर सरकंडा थाने में मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि हीरा प्रसाद खांडेकर ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी सहायता योजना के तहत चार लाख रुपये की राशि प्राप्त करने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किए तथा सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी की। इस कथित कृत्य से सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया गया है।
बचाव पक्ष ने दी ये दलीलें
आरोपी की ओर से अधिवक्ता सुमित झावर, चन्द्र कुमार साहू, उमाशंकर जांगड़े और यातिका वर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत नियमित जमानत याचिका प्रस्तुत की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और सहायता राशि संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद स्वीकृत की गई थी। बचाव पक्ष ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण सांप का काटना दर्ज होने का हवाला देते हुए कहा कि आरोपों और आरोपी की कथित भूमिका का परीक्षण विचारण के दौरान किया जाना चाहिए। यह भी दलील दी गई कि मुकदमे के निपटारे तक आरोपी को लगातार जेल में रखना उचित नहीं है।
शासन ने किया जमानत का विरोध
राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र श्रीवास्तव ने जमानत का विरोध किया। शासन की ओर से कहा गया कि आरोपियों ने कथित तौर पर सह-आरोपियों के साथ मिलकर मौत के वास्तविक कारण को छिपाया और सरकारी योजना के तहत चार लाख रुपये की सहायता राशि धोखे से प्राप्त की। अभियोजन ने मामले को गंभीर प्रकृति का बताते हुए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने की दलील दी।
हिरासत अवधि और मामले की परिस्थितियों पर विचार
हाईकोर्ट ने केस डायरी, आरोपों की प्रकृति, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपी की हिरासत अवधि सहित संबंधित परिस्थितियों पर विचार किया। अदालत ने माना कि आरोपों की वास्तविकता का परीक्षण विचारण के दौरान किया जाएगा। मुकदमे के पूरा होने में समय लगने की संभावना को देखते हुए लगातार हिरासत में रखने का औचित्य नहीं पाया गया और नियमित जमानत मंजूर कर ली गई।
जमानत के साथ रखी गईं शर्तें
अदालत ने आरोपी को संबंधित विचारण न्यायालय की संतुष्टि के लिए 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत मुचलका प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है। साथ ही पुलिस पूछताछ के लिए उपस्थित रहने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने तथा निष्पक्ष और शीघ्र विचारण में बाधा नहीं डालने जैसी शर्तों का पालन करना होगा।
उल्लेखनीय है कि इसी मामले में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर सहित अन्य आरोपियों को भी पहले हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। हालांकि, जमानत मिलना आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय में विचारण के बाद होगा।
