राजपुर क्षेत्र में कुख्यात कारोबारी विनोद अग्रवाल उर्फ़ मग्गू सेठ की गिरफ्तारी के बाद हालात लगातार गरमा रहे हैं। ज़मीन कब्ज़ा, आदिवासियों को धमकाने और विवादित गतिविधियों के आरोपों से घिरे सेठ पर भैराराम पहाड़ी कोरवा (राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र) की आत्महत्या के बाद जनाक्रोश चरम पर पहुँच गया है।
क्या है मामला?
भैराराम ने 22 अप्रैल 2025 को आत्महत्या कर ली। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि मग्गू सेठ द्वारा सामुदायिक भूमि हड़पने और लगातार धमकियों से तंग आकर उसने यह कदम उठाया। घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश की लहर दौड़ा दी।

सेठ का आपराधिक इतिहास
लंबे समय से गरीबों और आदिवासियों की ज़मीन कब्ज़ाने के आरोप।
क्रशर हत्याकांड और कई विवादित मामलों में नाम।
कई एफआईआर दर्ज, लेकिन गिरफ्तारी से बचते रहे।
अग्रिम जमानत की अर्जी निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक खारिज।
दबाव बढ़ने पर अदालत में सरेंडर करना पड़ा।
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही जनता का गुस्सा भड़क उठा प्रदर्शनकारियों की माँग है कि सिर्फ जेल भेजना पर्याप्त नहीं।आरोपी का सिर मुंडवाकर जुलूस निकाला जाए ताकि अपराधियों को सख्त संदेश मिल सके।
पुलिस पर सवाल

क्या पुलिस वाकई गिरफ्तारी में गंभीर थी या यह महज़ जनआक्रोश को शांत करने का तरीका?
जनता का मानना है कि यदि आरोपी सीधे अदालत पहुँच गया, तो यह पुलिस की नाकामी है।
संघर्ष समिति की चेतावनी
सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति ने साफ़ कहा –
भैराराम को न्याय दिलाने के लिए कठोर कार्रवाई ज़रूरी है। वरना आंदोलन और उग्र होगा और सरगुजा संभाग में बड़ा जनआंदोलन खड़ा होगा।
