बाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से विकसित होंगे सीमावर्ती गांव बढ़ेंगे रोज़गार के अवसर, पलायन पर लगेगी लगाम, सीमा होगी सुरक्षित

बहराइच  पंचायतों के समग्र प्रदर्शन को बेहतर बनाने हेतु जनपद स्तरीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ‘पंचायत एडवॉसमेन्ट इंडेक्स (पीएआई) की जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से उत्थान आडिटोरियम बहराइच में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चन्द्र ने बताया कि बाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत अन्तर्राष्ट्रीय सीमावर्ती ग्रामों में जीविकोपार्जन के लिए पलायन

तथा विभिन्न प्रकार के अपराधों पर अंकुश लगाये जाने के उद्देश्य से केन्द्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों से शत-प्रतिशत संतृप्त किया जाना तथा विभिन्न सुरक्षा एजेन्सियों के बीच बेहतर तालमेल बनाते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में घटित होने वाले विभिन्न प्रकार के अपराधों पर अंकुश लगाना है।

सीडीओ  चन्द्र ने बताया कि बाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य उत्तरी सीमा से लगे सीमावर्ती गांवों का व्यापक विकास करना है, ताकि इन क्षेत्रों से लोगों का पलायन रुके और उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर मिलें। इसका लक्ष्य बुनियादी ढांचे, जैसे सड़क, ऊर्जा और टेलीकॉम कनेक्टिविटी में सुधार करना, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और पर्यटन व संस्कृति को बढ़ावा देना है।

सीडीओ ने सभी सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्थलीय भ्रमण कर विभागीय योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर लें। श्री चन्द्र ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्ययोजना तैयार करते समय इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाय कि ग्रामवासियों को रोज़गार उपलब्ध हो सके।

योजना अन्तर्गत बुनियादी ढांचे के विकास अन्तर्गत सड़क, ऊर्जा, और टेलीकॉम कनेक्टिविटी में सुधार करना, आजीविका के अवसर सृजन के तहत कौशल विकास, उद्यमिता, और सहकारी समितियों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, स्थायी विकास अन्तर्गत स्थानीय प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों के आधार पर स्थायी इको-एग्री बिजनेस विकसित करना, सामाजिक कल्याण के तहत गांवों में रहने वाले लोगों को सभी सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ सुनिश्चित करना है।

ग्रामवासियों के पलायन पर अंकुश के लिए सीमावर्ती गांवों में रहने के लिए निवासियों को प्रोत्साहित करना, एक गांव एक उत्पाद की धारणा को विकसित करते हुए पर्यटन और संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और विरासत को बढ़ावा दिया जायेगा। वित्तीय समावेशन अन्तर्गत वित्तीय सेवाओं तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करना, महिला और युवा सशक्तिकरण अन्तर्गत कौशल विकास और उद्यमिता के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाना है। सीडीओ ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की सीमा सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान आयुष चिकित्सक डॉ. पीयूष नायक ने कार्ययोजना तैयार करने के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण सुझाव दिये।

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