असत्य पे सत्य की जीत की भावना लेकर किया गया बाँकी मोंगरा में रावण दहन

कोरबा जिला के बाँकी मोंगरा में हुआ रावण दहन कार्यक्रम सम्पन्न।
भारत में विजयदशमी के पर्व पर रावण दहन के कार्यक्रमों में भारी बारिश ने बाधा डाली.
भारी बारिश के बावजूद रावण दहन की परंपरा का निर्वाह किया गया.
रावण दहन का महत्व

रावण दहन भगवान राम की जीत का प्रतीक है, जिन्होंने रावण को हराकर सीता को बचाया था।

यह आयोजन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।

रावण दहन के दौरान लोग अपने अंदर की बुराइयों को जलाने का संकल्प लेते हैं।


रावण दहन की तैयारी

रावण दहन के लिए बड़े-बड़े पुतले बनाए जाते हैं।

इन पुतलों में आतिशबाजी और अन्य सामग्री भरी जाती है।

रावण दहन के दिन लोग इकट्ठे होकर पुतलों को जलाते हैं और जयकारे लगाते हैं।

रावण दहन का समय

रावण दहन का शुभ मुहूर्त शाम को प्रदोष काल में होता है
यह समय सूर्यास्त के बाद का होता है, जब रावण के पुतले को जलाया जाता है।

रावण दहन के दौरान सावधानियां

रावण दहन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं।

लोगों को पुतले से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

कुछ जगहों पर रावण दहन पर बारिश का साया मंडरा रहा है। कोरबा जिला और आसपास के जिलों में बुधवार की रात से ही जो बारिश का क्रम आरंभ हुआ वह सुबह तक चलता रहा है। गुरुवार को भी आसमान में बादल ने कोई कसर नही छोड़ा।

 

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