शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कोरबा जिले के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। राज्य शासन के निर्देशों के तहत जिले में अतिशेष शिक्षकों की काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब शिक्षकविहीन और एकलशिक्षकीय विद्यालयों को राहत मिल रही है।
इसी क्रम में कोरबा विकासखंड के ग्राम कदमझेरिया की प्राथमिक शाला में अब दो शिक्षक नियुक्त हो गए हैं। पहले यह स्कूल एकलशिक्षकीय था, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अब दो शिक्षकों की मौजूदगी से बच्चों को लगातार पढ़ाई का अवसर मिल रहा है, और कोई भी कक्षा अब खाली नहीं जाती।
पहाड़ों और जंगलों के बीच बसे इस विद्यालय में अधिकतर बच्चे पहाड़ी कोरवा जनजाति से आते हैं। छात्रा ज्योति और छात्रों राजेश, जितेश व सुमित्रा ने बताया कि पहले सिर्फ एक सर थे, जो एक कमरे में पढ़ाते थे, लेकिन अब एक नई मैडम भी आ गई हैं। अब सभी कक्षाओं में पढ़ाई होती है और हमें स्कूल अच्छा लगने लगा है।
जिले भर में 305 अतिशेष शिक्षकों का समायोजन किया गया है। इनमें से 14 शिक्षकविहीन और 273 एकलशिक्षकीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भेजे गए हैं। वहीं मिडिल स्कूलों में 20 एकलशिक्षकीय, 4 शिक्षकविहीन और 62 द्विशिक्षकीय स्कूलों में अब तीन-तीन शिक्षक उपलब्ध हो गए हैं।
हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में भी गणित, रसायन, भौतिकी, हिंदी, अंग्रेज़ी और कॉमर्स जैसे विषयों की कमी को दूर करते हुए 74 अतिशेष व्याख्याताओं की नियुक्ति की गई है।
इस समायोजन से न केवल विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल रही है, बल्कि शिक्षकों के कार्यभार का संतुलन भी बन रहा है। पहले जहां एक शिक्षक पर कई कक्षाओं की जिम्मेदारी होती थी, वहीं अब प्रत्येक कक्षा को उचित समय और ध्यान मिलपा रहा है।
