एनएचएम संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाएं ठप, जिला अस्पतालों में टीकाकरण से लेकर SNCU तक की सेवाएं प्रभावित

कोंडागांव, 22 अगस्त 2025, — राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने जिले भर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हड़ताल के चलते राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर सीधा असर पड़ा है, जिससे आम नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

सूत्रों के अनुसार, निम्नलिखित महत्वपूर्ण सेवाएं हड़ताल से प्रभावित हो रही हैं:

 

टीकाकरण अभियान: बच्चों और गर्भवती महिलाओं को नियमित टीके नहीं लग पा रहे हैं।

 

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम: मानसिक रोगियों की काउंसलिंग और इलाज रुका हुआ है।

 

राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम (टीबी): टीबी रोगियों की दवा वितरण और जांच प्रक्रिया बाधित है।

 

फिजियोथैरेपी (राष्ट्रीय बुजुर्ग स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम): बुजुर्गों को मिलने वाली फिजियोथैरेपी सेवाएं बंद हैं।

 

SNCU (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) और NBSU (नवजात देखभाल इकाई): नवजात शिशुओं की इमरजेंसी देखभाल में संकट।

 

हमर लैब: जाँच सेवाएं पूरी तरह ठप हैं।

 

परिवार परामर्श केंद्र: गर्भनिरोधक व परामर्श सेवाएं प्रभावित।

 

डेंटल क्लिनिक एवं ईएनटी (नाक, कान, गला विभाग): रोगी लौटाए जा रहे हैं।

 

तम्बाकू नशा मुक्ति केंद्र: परामर्श और दवा वितरण रुका हुआ।

 

मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम: सर्वे व दवा वितरण में बाधा।

 

 

हड़ताल से जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं तक प्रभावित हो रही हैं, जिससे गंभीर मरीजों की जान को खतरा उत्पन्न हो गया है।

 

हड़ताली कर्मचारियों की मांगें

संविदा कर्मचारी नियमितीकरण, वेतनमान में वृद्धि और भविष्य निधि जैसी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

 

प्रशासन की प्रतिक्रिया

जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था की कोशिश की जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों की कमी के चलते सेवाएं सुचारु रूप से नहीं चल पा रही हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी हड़ताली कर्मचारियों से वार्ता कर समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

 

निष्कर्ष

यदि जल्द ही इस हड़ताल का हल नहीं निकला, तो यह स्थिति गंभीर स्वास्थ्य संकट में बदल सकती है। मरीजों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निरंतरता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

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