कोरबा। जिला खनिज न्यास मद के दुरुपयोग की शिकायत की जांच के लिए बिलासपुर संभाग आयुक्त की ओर से गठित एक टीम बुधवार को कोरबा पहुंची। इस टीम में उपायुक्त (विकास) हरिशंकर चौहान और उपायुक्त (राजस्व) स्मृति तिवारी शामिल हैं। यह जांच टीम खनिज न्यास मद के दुरुपयोग से संबधित शिकायतों की जांच कर अपनी रिपोर्ट संभागायुक्त को देगी। टीम को 15 के दिन भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा गया है।
जानकारी के अनुसार कोरबा के सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी चौहान ने 22 अक्टूबर 2024 को कोयला मंत्रालय में एक शिकायत की थी। इसमें कोरबा जिले में जिला खनिज प्रतिष्ठान ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड के दुरूपयोग और कुप्रबंधन का आरोप लगाया गया था। कोयला मंत्रालय ने उस समय इस शिकायत को जांच के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को भेजा था। मुख्य सचिव ने शिकायत पत्र को जांच के लिए खनिज संसाधन विभाग को दिया। खनिज विभाग ने शिकायत को जांच के लिए बिलासपुर संभाग आयुक्त को भेजा। संभाग आयुक्त कार्यालय में कई माह तक शिकायत की जांच फाइलों बंद रही। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में संभाग आयुक्त कार्यालय से पत्राचार किया, तो शिकायत को जांच के लिए कोरबा कलेक्टर को भेज दिया गया। लेकिन इस शिकायत पर जांच नहीं हुई। पांच बार रिमाइंडर भी दिया गया, जो बेनतीजा रहा। कई माह तक इंतजार के बाद भी जब डीएफएम फंड के दुरूपयोग और कुप्रबंधन की जांच शुरू नहीं हुई, तो लक्ष्मी चौहान ने एक बार फिर कोल मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया और उन्होंने एक बार फिर शिकायत्त की लेकिन मामले की जांच शुरू नहीं हुई।
मामले में कार्रवाई नहीं होने से क्षुब्ध शिकायतकर्ता लक्ष्मी चौहान ने इस मामले को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की याचिका पर सोमवार को बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने जिला खनिज न्यास फंड के दुरूपयोग से संबंधित अपना पक्ष हाईकोर्ट में रखा, तब राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने कोर्ट को बताया कि यह शिकायत खनन मंत्रालय भारत सरकार के अवर सचिव के द्वारा 20 नवंबर 2024 को राज्य सरकार तक पहुंची थी। इसके बाद बिलासपुर संभागायुक्त ने कोरबा के जिला अधिकारी को इसकी जांच करने कहा था। इस मामले की ‘जांच के लिए संभागायुक्त की ओर से तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है।
मामले को लेकर लक्ष्मी चौहान, शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार से साल भर पहले शिकायत कि थी कि जो डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फाउंडेशन कोरबा है, वो भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार का जो रुल है, उसके नियमानुसार काम नहीं कर रही है। इस पर केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार के चीफ सेक्रेटरी को एक साल पहले जांच के लिए बोला गया था। लेकिन उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। उसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जाकर जनहित याचिका दायर किया। तब सरकार ने कहा कि जांच कमेटी बना रहे हैं और वह कमेटी जांच करेगी। उसी के तहत बुधवार को यह जांच कमेटी कोरबा आई, जिसमें उन्होंने अपनी सारी बात रखी है। टीम रिपोर्ट देगी उसके बाद वे फिर इनकी रिपोर्ट का क्रॉस वेरिफिकेशन करके कोर्ट को बताएंगे कि अभी भी क्या गलती है।
इस सिलसिले में हरिशंकर चौहान, उपायुक्त और जांच अधिकारी ने बताया कि DMF फंड कि यहां पर शिकायत हुई थी। शिकायत में हम लोगों की टीम बनी हुई है। टीम में डेवलपमेंट डिप्टी कमिश्नर और रेवेन्यू डिप्टी कमिश्नर दोनों आए हैं। विशेष कर यह शिकायत हुआ है कि प्रत्यक्ष की जगह अप्रत्यक्ष क्षेत्र में काम ज्यादा हुआ है या गाइडलाइन के तहत जिनको जो लाभ देना था प्रभावित लोग जो हैं उनको अल्प मात्रा में दिया गया है। इसकी शिकायत हुई है, जिसकी जांच हम लोग कर रहे हैं। शिकायतकर्ता उपस्थित हुए थे। उनका बयान हमने लिया है। ऑलरेडी अभी हमारी जांच प्रक्रिया जारी है।
सवालों के घेरे में पूर्व कलेक्टर अजीत वसंत
इस मामले में संभाग आयुक्त कार्यालय ने करीब डेढ़ साल की अवधि में कोरबा के तत्कालीन कलेक्टर अजीत वसंत के नाम पांच बार पत्र भेजा। सभी पत्र में खनिज प्रतिष्ठान फंड के कुप्रबंधन और दुरूपयोग की जांच करने के लिए कहा गया था। लेकिन कोरबा में कलेक्टर रहते अजीत बसंत ने इस मामले की जांच नहीं कराई। तब शिकायतकर्ता ने बिलासपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। अब पूर्व कलेक्टर अजीत वसंत भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। विवादास्पद कलेक्टर अजीत वसंत पर कद्दावर भाजपा नेता और प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया है। लिहाजा उनके कार्यकाल के DMF के कार्यों की भी जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
