कोंडागांव, 19 जून 2025 — नगर के मुख्य प्रवेश द्वार नारंगी नदी पुल के समीप नगर पालिका परिषद द्वारा शहर का कचरा खुले में डंप किया जा रहा है। यह नजारा न केवल स्वच्छता मिशन की भावना पर सवाल खड़े करता है, बल्कि स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी खतरे की घंटी बजा रहा है।
गुरुवार दोपहर लगभग 3 बजे जब रिपोर्टर की टीम मौके पर पहुँची, तो देखा गया कि कचरे के ढेर के बीच दुर्गंध में लिपटे कर्मचारी बिना किसी सुरक्षात्मक उपकरण के काम करने को मजबूर हैं। न मास्क, न दस्ताने और न ही जूतों की व्यवस्था — कर्मचारियों ने बताया कि कई बार माँग करने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुरक्षा संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि कचरे की दुर्गंध और फैलने वाली बीमारियों के चलते उनका जीना दूभर हो गया है। नगर पालिका न तो कचरे के निस्तारण के लिए कोई निश्चित स्थान तय कर पाई है और न ही कर्मचारियों के स्वास्थ्य परीक्षण की कोई व्यवस्था है।
एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम बार-बार कह चुके हैं कि हमें सुरक्षात्मक गियर दिए जाएँ, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। अगर इसी तरह चलता रहा तो हम और हमारे परिवार किसी गंभीर बीमारी के शिकार हो सकते हैं।”
स्वच्छ भारत अभियान की जिस परिकल्पना को लेकर सरकार देशभर में कार्य कर रही है, कोंडागांव की यह स्थिति उसके ठीक विपरीत प्रतीत होती है। प्रशासन की लापरवाही और अव्यवस्था के चलते न केवल शहर की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि आमजन और कर्मचारियों का जीवन भी संकट में पड़ता जा रहा है।
कोंडागांव नगर पालिका परिषद से अपेक्षा है कि जल्द से जल्द उचित स्थान पर कचरा निस्तारण की व्यवस्था की जाए और कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण तथा नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि जनस्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।
