दिगम्बर जैन समाज के पयुर्षण पर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा के रूप मे मनाया

दिगम्बर जैन समाज के पयुर्षण पर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा के रूप मे मनाया

अरनोद ।दिगंबर जैन समाज के पयूर्षण के पहले दिन उत्तम क्षमा के रूप मे मनाया गया। पर्यूषण पर्व के पहले दिन बुधवार सुबह 8 बजे सागर से आये शास्त्री सन्मति दिवाकर के सानिध्य श्रीजी का पंचामृत महा अभिषेक किया गया। ऋषी पंचमी के पांच कलशों से पाडुक शिला पर विराजित चौबीसों भगवान का अभिषेक किया गया। उसके बाद मूलनायक महावीर स्वामी, वासूपूज्य भगवान व चोबिसों भगवान की महाशान्ति धारा कि गई। तपश्चात जन्मकल्याणक की आरती की गई। 10 बजे नित्य नियम की  पूजा शुरू हुई जिसमें सामूहिक रूप से नित्य नियम ,सोलह कारण पूजा, पंच मेरू पूजा, दस लक्षण पूजा कर विविध अर्घ्य चढ़ाए गए ।

पुजन का दोपहर 1 बजे विर्सजन हुआ। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने नृत्य के साथ जमकर भक्ति की। डांडिया नृत्य, नागिन नृत्य, गरबा नृत्य के साथ युवतियों ने जैन भजनों पर आर्कषक प्रस्तुतियां दी। शाम 6 बजे सामयिक प्रतिक्रमण के कार्यक्रम तथा शाम 8 बजे महाआरती का कार्यक्रम हुआ। इस अवसर प्रवर्चन में शास्त्री सन्मति दिवाकर ने बताया कि  भलाई के लिए जो हित मित प्रिय वचन बोले जाए उसे ही क्षमा कहते है अर्थात् उत्तम का अर्थ है यर्थात परिमित वचन बोलना।  मिथ्याभाषी वालों के लिए सभी शत्रु बन जाते है एवं असत्य ही जीवन में अनेक दुर्गुणों को जन्म देता है। क्षमा समस्त सदगुणो से जीवन को श्रृंगारित करता है। क्षमा जीवन का श्रृंगार है । इस अवसर पर सभी ने अपने अपनी दुकाने बन्द रखी । 

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