कोण्डागांव पुलिस की बड़ी सफलता: पुलिस अधीक्षक वाय अक्षय कुमार ने लौटाए 25 लाख के गुम मोबाइल, 115 मोबाइल एक माह में रिकवर

कोण्डागांव, 31 अगस्त 2025: जिले में पुलिस अधीक्षक वाय. अक्षय कुमार के निर्देश पर साइबर सेल द्वारा गुम मोबाइलों की खोजबीन के लिए चलाए गए विशेष अभियान में बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस अभियान के तहत एक माह की अवधि में कुल 115 गुम हुए मोबाइल फोन रिकवर किए गए, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 25 लाख रुपए है।

 

मोबाइल वितरण का आयोजन:

पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित समारोह में रिकवर किए गए मोबाइल फोन उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाए गए। इस दौरान कई नागरिकों ने बताया कि उन्होंने अपने मोबाइल की वापसी की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन पुलिस की तत्परता से उन्हें दोबारा उनका कीमती मोबाइल प्राप्त हुआ।

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महंगे ब्रांड के मोबाइल भी शामिल:

रिकवर किए गए मोबाइलों में आईफोन, वनप्लस, सैमसंग, वीवो, रेडमी जैसे महंगे ब्रांड के मोबाइल शामिल हैं। ये मोबाइल छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों – बस्तर, बीजापुर, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग सहित सीमावर्ती राज्य – ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना से भी बरामद किए गए हैं।

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साइबर सेल की मेहनत रंग लाई:

अभियान को सफल बनाने में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कौशलेंद्र देव पटेल और उप पुलिस अधीक्षक (सायबर सेल) सतीष कुमार भार्गव के मार्गदर्शन में सायबर सेल की टीम दिन-रात जुटी रही।

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अब तक 1500 से अधिक मोबाइल खोजे गए:

कोण्डागांव साइबर सेल की यह कोई पहली सफलता नहीं है। गठन के बाद से अब तक साइबर सेल ने 1500 से अधिक गुम हुए मोबाइलों को खोजकर उनके मालिकों तक पहुंचाया है, जिनकी कुल कीमत करीब 1 करोड़ रुपए आँकी गई है।

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पुलिस अधीक्षक की अपील: वाय. अक्षय कुमार ने नागरिकों से अपील की है कि अगर किसी को कोई अन्य व्यक्ति का मोबाइल मिलता है तो उसे नजदीकी थाना में जमा करें। बगैर बिल के मोबाइल खरीदने से बचें और दूसरों के मोबाइल का गलत उपयोग न करें।

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साथ ही उन्होंने साइबर अपराध से बचाव के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 और सायबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।

 

टीम की सराहनीय भूमिका:

मोबाइल रिकवरी अभियान में साइबर सेल के अधिकारी और जवानों – निरीक्षक सौरभ उपाध्याय, सागरबती सोरी, लूमन सिंह भंडारी, जितेन्द्र मरकाम, चैतराम मरकाम, बीजू यादव, मनोज पोयाम, कृष्णा नेताम, मनीष बोस, मनोज मरकाम, लखुराम मरकाम, और रमेश बर्मन – की विशेष भूमिका रही।

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कोण्डागांव पुलिस की यह पहल न सिर्फ तकनीकी दक्षता का उदाहरण है, बल्कि जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और विश्वास की मिसाल भी है।

 

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