कोंडागांव, 12 सितंबर 2025 – छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के 16,000 से अधिक संविदा कर्मचारी पिछले एक महीने से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। आज हड़ताल के 25वें दिन उनके आंदोलन को और अधिक बल मिला, जब सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ, कोंडागांव के संविदाकर्मी एकदिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर धरना स्थल डीएनके कॉलोनी पहुंचे और अपना समर्थन दर्ज कराया।
संघ द्वारा जारी बयान में बताया गया कि NHM कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगें पूर्णतः जायज हैं और उन्हें तत्काल पूरा किया जाना चाहिए। महासंघ ने कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि "आप लोग स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं, शासन आपको अनदेखा नहीं कर सकता। जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं, तब तक पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।"
राजनीतिक वादाखिलाफी पर नाराजगी

धरना स्थल पर पहुंचे कर्मचारियों ने दो वर्ष पूर्व जुलाई 2023 की याद दिलाई, जब रायपुर के तूता धरना स्थल पर कांग्रेस शासनकाल में सभी विभागों के संविदा कर्मचारी एकजुट होकर आंदोलनरत थे। उस समय बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता, जिनमें वर्तमान उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी, गृहमंत्री श्री विजय शर्मा, और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष श्री नारायण सिंह चंदेल शामिल थे, मंच पर आकर आश्वासन दिया था कि सरकार बनने पर 100 दिन के भीतर संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की दिशा में ठोस कार्य किया जाएगा।
लेकिन आज दो साल बाद भी न तो कोई कमेटी बनी, न ही कोई नीति सामने आई। इस बात से कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। NHM कर्मचारी अब तक 160 बार से अधिक विधायकों और सांसदों को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है।
महाराष्ट्र मॉडल की मांग

संविदा कर्मचारियों ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने NHM कर्मचारियों की 13 में से 10 मांगें मान ली हैं, जिससे यह साबित होता है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो संविदा कर्मचारियों की समस्याएं सुलझाई जा सकती हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ सरकार से भी यही अपेक्षा है कि वह कर्मचारियों के हक में निर्णय ले।
हर स्तर पर समर्थन का वादा
सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ ने भरोसा दिलाया कि NHM कर्मचारियों को जब भी जरूरत होगी, महासंघ उनके साथ खड़ा रहेगा – चाहे वह भौतिक रूप से हो या आर्थिक रूप से।
NHM संविदा कर्मचारियों की हड़ताल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है, और अब यह देखना बाकी है कि शासन उनकी मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
