बीपीएल कार्ड से शिक्षिका को तीर्थ यात्रा करना पड़ा महंगा, कार्यवाही की मांग

शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला महासमुन्द जिले से सामने आया है। यहां शासकीय उच्च माध्यमिक शाला में पदस्थ एक महिला व्याख्याता पर मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का अनुचित लाभ लेने का आरोप लगा है। आरोप है कि शिक्षिका ने अपने शासकीय पद को छुपाकर और स्वयं को बीपीएल श्रेणी का दर्शाते हुए सरकारी खर्च पर तीर्थ यात्रा की।

छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति, रायपुर द्वारा की गई शिकायत के अनुसार, किरण पटेल, जो शासकीय उच्च माध्यमिक शाला बेमचा में व्याख्याता (एलबी) के पद पर कार्यरत हैं, ने 27 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 के बीच प्रयाग–काशी विश्वनाथ तीर्थ यात्रा की। योजना के नियमों के तहत शासकीय सेवकों और अपात्र व्यक्तियों को इसका लाभ नहीं दिया जा सकता, इसके बावजूद कथित रूप से नियमों को दरकिनार किया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिक्षिका ने फर्जी बीपीएल कार्ड के माध्यम से खुद को गरीब श्रेणी में शामिल करवाया और आवेदन के साथ दिए गए शपथ पत्र में स्वयं को शासकीय सेवक न बताते हुए झूठी घोषणा की। इतना ही नहीं, अपने परिजनों को भी योजना का लाभ दिलवाए जाने का आरोप है।

नागरिक कल्याण समिति ने इस पूरे मामले को शासन के साथ छल और विश्वासघात बताते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और जिला कलेक्टर से शिकायत की है। समिति ने शिक्षिका को निलंबित करने, विभागीय जांच के बाद बर्खास्तगी और धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

शिकायत के साथ आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं, जिनमें आवेदन पत्र और शपथ पत्र की प्रतियां शामिल हैं। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस कथित हाई-प्रोफाइल मामले में क्या कार्रवाई करता है या मामला जांच के दायरे में आगे बढ़ता है।

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