जांजगीर-चांपा स्वच्छता केवल सफाई तक सीमित नहीं, बल्कि स्वस्थ और व्यवस्थित जीवन की आधारशिला है। पामगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत बारगांव ने जनभागीदारी के साथ स्वच्छता को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी बनाते हुए इसी सोच को जमीन पर साकार किया है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आई बारगांव की यह ‘बदलाव की कहानी’ बताती है कि जागरूकता और ग्रामीणों की सहभागिता से गांव की तस्वीर किस तरह बदली जा सकती है। कुछ समय पहले तक खुले में शौच की समस्या गांव के लिए एक बड़ी चुनौती थी। स्वच्छता के महत्व को लेकर लगातार जागरूकता के साथ महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ी। इसका परिणाम रहा कि गांव के परिवारों के लिए 436 शौचालयों का निर्माण हुआ और शौचालय का नियमित उपयोग ग्रामीण जीवन का हिस्सा बन गया।
शौचालय के बाद अगला कदम बना कचरा प्रबंधन
ग्राम पंचायत बारगांव में स्वच्छता को केवल घरों तक सीमित न रखते हुए गांव के समग्र कचरा प्रबंधन पर भी काम किया गया। जैविक कचरे के प्रबंधन के लिए वर्मी कम्पोस्ट और नाडेप टैंक तैयार किए गए, जबकि सूखे कचरे के व्यवस्थित प्रबंधन के लिए सेग्रिगेशन शेड की व्यवस्था की गई। गांव से निकलने वाले सूखे कचरे के संग्रहण की जिम्मेदारी स्व-सहायता समूह को दी गई। इससे एक ओर गांव की स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिली, वहीं दूसरी ओर महिला समूहों की भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला।
अब कचरे को चार श्रेणियों में अलग करने की पहल
ग्राम पंचायत बारगांव अब कचरा प्रबंधन को और अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एसडब्ल्यूएम रूल्स 2026 के तहत स्वच्छाग्रही दीदियों एवं मिशन के अमले द्वारा ग्रामीणों को घर से निकलने वाले चार प्रकार के कचरे का पृथक्करण और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार संग्रहण करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। स्वच्छाग्रही दीदियां घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को कचरे को अलग-अलग रखने, निर्धारित संग्रहण व्यवस्था में देने और उसके उचित प्रबंधन के बारे में समझा रही हैं। इससे कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण को बढ़ावा मिल रहा है और गांव में अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्राम पंचायत बारगांव खुले में शौच की समस्या से मुक्ति, शौचालयों का नियमित उपयोग और कचरा प्रबंधन की ओर बढ़ती जागरूकता गांव में आए बदलाव को दर्शाती है। बारगांव की यह ‘बदलाव की कहानी’ दिखाती है कि जब शासन की योजनाओं के साथ समुदाय की भागीदारी जुड़ती है, तो बदलाव केवल दिखाई नहीं देता, बल्कि लोगों की आदतों और व्यवहार का हिस्सा बनने लगता है।
