Anp News दीयों की रोशनी के साथ चमक रही महिलाओं की जिंदगी, जागृति समूह बना आत्मनिर्भरता की मिसाल

Anp News Live Korba त्योहारों की खुशियां उस समय और भी खास हो जाती हैं, जब उनके साथ किसी के जीवन में खुशहाली और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत भी जुड़ जाए। इस दिवाली बालकोनगर में जागृति स्व सहायता समूह की महिलाएं अपने हुनर और मेहनत के दम पर महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल पेश कर रही हैं। समूह की महिलाओं द्वारा तैयार आकर्षक सजावटी दीये, दिवाली की सजावट से जुड़ी सामग्री, सलोनी, नमकीन खाजा और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक उत्पाद अब सेक्टर-1 स्थित ब्लैकमेज़ में उपलब्ध हैं।

बालको सीएसआर के सहयोग से जागृति स्व सहायता समूह की महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल और रचनात्मकता को आजीविका का माध्यम बना रही हैं। इस पहल से महिलाओं को घर की सीमाओं से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा दिखाने, आर्थिक रूप से सशक्त बनने और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त करने में मदद मिल रही है।

भारती साहू के हुनर को मिला नया मंच

इस समूह से जुड़ी साडा कॉलोनी निवासी भारती साहू की कहानी महिला आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है। भारती वर्ष 2020 से जागृति स्व सहायता समूह के साथ जुड़ी हुई हैं। बालको सीएसआर के सहयोग से उन्हें अपने हुनर को पहचानने, उसे निखारने और आजीविका से जोड़ने का अवसर मिला।

समूह से जुड़ने के बाद भारती ने न केवल अपनी रचनात्मक क्षमता को एक नई पहचान दी, बल्कि अन्य महिलाओं के साथ मिलकर सामूहिक रूप से काम करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया। आज उनके साथ समूह की लगभग 35 से 36 महिलाएं विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार करने में जुटी हैं।

स्थानीय परंपरा और महिलाओं की रचनात्मकता का संगम

जागृति स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों में स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान और महिलाओं की कलात्मक प्रतिभा की झलक दिखाई देती है। सजावटी दीयों से लेकर दिवाली की आकर्षक सामग्री और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खाद्य उत्पादों तक, समूह की महिलाएं अपने कौशल को नए बाजार से जोड़ रही हैं।

इन उत्पादों को बाजार में उपलब्ध कराने से महिलाओं को अपने काम की पहचान बनाने और ग्राहकों तक सीधे पहुंचने का अवसर मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर महिला उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

आपकी छोटी खरीदारी, महिलाओं के बड़े सपनों को देगी उड़ान

इस दिवाली जागृति स्व सहायता समूह के उत्पाद खरीदना केवल त्योहार की खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय महिला उद्यमियों की मेहनत को सम्मान देने और उनके आत्मनिर्भरता के सफर में सहयोग करने का अवसर भी है।

बालको सीएसआर के सहयोग से आगे बढ़ रहीं ये महिलाएं साबित कर रही हैं कि सही मार्गदर्शन, अवसर और सामूहिक प्रयास से हुनर को रोजगार में बदला जा सकता है। स्थानीय उत्पादों को अपनाकर लोग न केवल छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और संस्कृति को बढ़ावा दे सकते हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की इस पहल को भी मजबूती दे सकते हैं।

इस दिवाली संदेश साफ है—स्थानीय हुनर को अपनाएं, महिला उद्यमियों का उत्साह बढ़ाएं और आत्मनिर्भरता की रोशनी हर घर तक पहुंचाएं।

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