रायगढ़-हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री और अपनी मधुर स्वर साधना के लिए प्रसिद्ध सुलक्षणा पंडित का गुरुवार को निधन हो गया। वह 71 वर्ष की थीं। उनके भाई और प्रसिद्ध संगीतकार ललित पंडित ने इस दुखद समाचार की पुष्टि करते हुए बताया कि सुलक्षणा जी को कार्डियक अरेस्ट आया था। उनके निधन से संगीत और सिनेमा जगत में गहरा शोक व्याप्त है।
रायगढ़ से थी सुलक्षणा पंडित की जड़ें
12 जुलाई 1954 को रायगढ़ की पुरानी बस्ती रामगुड़ी पारा स्थित अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय में जन्मीं सुलक्षणा पंडित ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रायगढ़ के पैलेस रोड स्थित शासकीय बालिका विद्यालय में प्राप्त की थी। कला और संगीत के माहौल में पली-बढ़ीं सुलक्षणा जी बचपन से ही सुरों के प्रति गहरी लगन रखती थीं।
उनके पिता श्री प्रताप नारायण पंडित, रायगढ़ के राजा चक्रधर सिंह के दरबार में प्रसिद्ध तबला वादक थे। परिवार में संगीत परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही थी, और यही परंपरा सुलक्षणा जी की प्रेरणा बनी।
भारतीय संगीत परिवार की महत्वपूर्ण सदस्य
सुलक्षणा पंडित भारतीय संगीत जगत के उस महान परिवार से थीं, जिसने देश को अनेक स्वर प्रतिभाएं दीं। वे महान शास्त्रीय गायक पंडित जसराज की भतीजी थीं। उनके भाई जतिन–ललित ने हिंदी फिल्म संगीत में एक लंबा और सफल सफर तय किया और अनगिनत सुपरहिट गीतों की रचना की।
नौ वर्ष की उम्र से शुरू हुई संगीत साधना
सुलक्षणा जी ने मात्र नौ वर्ष की आयु में संगीत की शिक्षा आरंभ कर दी थी। उनकी प्रतिभा ने जल्द ही सबका ध्यान आकर्षित किया। अपनी कोमल और भावपूर्ण आवाज़ से उन्होंने फिल्म संगीत में एक अलग पहचान बनाई।
फिल्मी करियर और यादगार गीत
सत्तर और अस्सी के दशक में सुलक्षणा पंडित ने गायकी के साथ-साथ अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने ‘चलते-चलते’, ‘उलझन’, ‘अपनापन’ जैसी अनेक फिल्मों में अपने मधुर स्वर का जादू बिखेरा। इन गीतों ने उन्हें फिल्म उद्योग में स्थापित किया और दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बनाई।
सिनेमा और संगीत जगत में शोक की लहर
सुलक्षणा पंडित के निधन से भारतीय फिल्म जगत ने एक बहुमुखी प्रतिभा को खो दिया है। संगीतकारों, गायकों और फिल्म कलाकारों ने उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक याद करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत को एक अनोखी गरिमा और संवेदना प्रदान की।
रायगढ़ की इस बेटी ने न केवल अपने शहर का, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया। उनका जीवन और कार्य भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
