नई दिल्ली/मरवाही
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी धरना-प्रदर्शन अब देशव्यापी युवा आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। प्रसिद्ध शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले लगभग 20 दिनों से अनशन पर बैठे थे, जिनकी मांगों और संघर्ष को अब देशभर के युवाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है। हाल ही में पुलिस द्वारा उन्हें धरना स्थल से हटाकर अस्पताल ले जाने की घटना ने इस आंदोलन को और उग्र बना दिया है।
बताया जा रहा है कि 18 तारीख की सुबह पुलिस बल ने हस्तक्षेप करते हुए सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई को उनके समर्थकों और युवाओं ने अलोकतांत्रिक और जबरदस्ती बताया, जिसके बाद पूरे देश में नाराजगी फैल गई। इसके विरोध में “दिल्ली चलो” का आह्वान किया गया, जिसके तहत विभिन्न राज्यों से युवा राजधानी पहुंच रहे हैं।
इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के मरवाही से पूर्व जिला पंचायत सदस्य शुभम पेंद्रो अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली पहुंचे और जंतर-मंतर पर आंदोलन में शामिल होकर अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब केवल एक व्यक्ति या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता की लड़ाई बन चुका है।
शुभम पेंद्रो ने विशेष रूप से नीट (NEET) परीक्षा में सामने आए पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को उठाते हुए कहा कि इसने लाखों छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय किया है। “देश का छात्र दिन-रात मेहनत करता है, लेकिन जब परीक्षा प्रणाली ही संदिग्ध हो जाए तो उसका भरोसा टूट जाता है। यह केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख का सवाल है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक स्वयं भी शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं और उन्होंने भी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। इस मुद्दे को लेकर अब आंदोलन और भी व्यापक होता जा रहा है।
शुभम पेंद्रो ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे घोटाले रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग करते हुए कहा कि “जब देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर हो, तब जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।”
उन्होंने जानकारी दी कि 20 जुलाई को प्रस्तावित “सांसद चलो मार्च” इस आंदोलन का अगला बड़ा कदम होगा, जिसमें देशभर के युवा शामिल होकर अपनी आवाज संसद तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। इस मार्च में शामिल होकर वे भी मजबूती से अपनी बात रखेंगे|
शुभम पेंद्रो ने छत्तीसगढ़ सहित देश के सभी युवाओं से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस आंदोलन और मार्च का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा, “आज का समय निर्णायक है। अगर युवा अब भी चुप रहे, तो आने वाला समय और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।”
धरना स्थल पर जुटे युवाओं का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों में नीट परीक्षा की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार शामिल हैं। साथ ही वे यह भी मांग कर रहे हैं कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से ले और त्वरित निर्णय करे।
जंतर-मंतर पर लगातार बढ़ती भीड़ और देशभर से मिल रहे समर्थन से साफ है कि यह आंदोलन अब एक बड़े जनआंदोलन में बदल चुका है। सोनम वांगचुक का लंबा अनशन, उनके साथ हुई कार्रवाई और युवाओं के मुद्दों का जुड़ना इस आंदोलन को और भी प्रभावशाली बना रहा है।
अब सभी की नजरें 20 जुलाई के “सांसद चलो मार्च” पर टिकी हैं, जो इस आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
