वेदांता का नंद घर मिशन: 16 राज्यों में 10,000 केंद्र, ग्रामीण भारत में शिक्षा, पोषण और सशक्तिकरण की नई पहचान

बाल दिवस के अवसर पर वेदांता समूह की सामुदायिक विकास शाखा अनिल अग्रवाल फाउंडेशन (AAF) ने देश की सामाजिक प्रगति में एक बड़ा मील का पत्थर दर्ज किया है। वेदांता की प्रमुख सामुदायिक पहल नंद घर मिशन अब 16 राज्यों में 10,000 केंद्रों तक पहुँच चुका है, जिसका लाभ प्रतिदिन 4 लाख से अधिक बच्चों और 3 लाख महिलाओं को मिल रहा है। यह उपलब्धि ग्रामीण भारत में शिक्षा, पोषण और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

 

आधुनिक आंगनबाड़ी मॉडल जिसने बदला ग्रामीण भारत

 

नंद घर ग्रामीण भारत की पारंपरिक आंगनबाड़ी प्रणाली को आधुनिक स्वरूप प्रदान कर रहा है।

प्रत्येक केंद्र में—

स्मार्ट क्लासरूम,

डिजिटल लर्निंग उपकरण,

बाला (Building as Learning Aid) डिज़ाइन)

विश्वसनीय बिजली,

स्वच्छ पेयजल एवं साफ-सुथरे शौचालय,

बच्चों के अनुकूल रंगीन फर्नीचर

उपलब्ध हैं, जो 3–6 वर्ष के बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण तैयार करते हैं।

 

 

शिक्षा के साथ-साथ नंद घर में पोषण कार्यक्रम, नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण अभियान, और महिलाओं के कौशल विकास प्रशिक्षण जैसी आवश्यक सेवाएँ भी प्रदान की जा रही हैं। यह मॉडल पूरे समुदाय को जोड़ने और सशक्त बनाने का केंद्र बन चुका है।

 

वेदांता समूह के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर कहा—

 

नंद घर की शुरुआत एक सपने के साथ हुई थी — कि देश का कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे और हर महिला आत्मनिर्भर बने। 16 राज्यों में 10,000 नंद घरों का पड़ाव पार करना उसी सपने का साकार रूप है। यह उपलब्धि सरकारों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से ही संभव हो सकी। हमारा लक्ष्य 8 करोड़ बच्चों और 2 करोड़ महिलाओं के जीवन में स्थायी बदलाव लाना है।”

 

देशभर में सकारात्मक बदलाव के केंद्र बने नंद घर

 

नंद घर मिशन की पहुँच—

ओडिशा के खनिज क्षेत्रों,

राजस्थान के रेगिस्तान,

छत्तीसगढ़ के वनांचल,

आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों,

उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और कई अन्य राज्यों

तक फैली हुई है।

 

यहाँ बच्चों को पौष्टिक गरम भोजन, डिजिटल तरीकों से सीखने की सुविधा और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं। नंद घर अब तक 80 लाख से अधिक पोषण पूरक वितरित कर चुका है। स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों की पहुँच 90 लाख से अधिक लोगों तक हो चुकी है।

 

महिलाओं को सिलाई, डिजिटल कौशल और माइक्रो-उद्यमिता जैसे प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें ₹10,000 तक की मासिक आय का अवसर मिल रहा है। स्थानीय महिलाओं का नेतृत्व ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

 

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की नंद घर वर्कर अंजू वैष्णव बताती हैं—

“पहले आंगनबाड़ी एक छोटा कमरा था। आज यह बच्चों का पसंदीदा केंद्र बन गया है। स्मार्ट टीवी, साफ-सफाई और पौष्टिक भोजन ने बच्चों और माताओं का भरोसा बढ़ाया है। नंद घर अब सीखने और खुशियों का ठिकाना बन चुका है।”

 

बाल दिवस पर दोहरी खुशी

 

इस वर्ष बाल दिवस पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया गया, क्योंकि नंद घर ने 10,000 केंद्रों की उपलब्धि भी इसी दिन हासिल की।

कला, कहानी, संगीत और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों ने उत्सव में भाग लिया। यह कार्यक्रम नंद घर मिशन की जमीनी सफलता को दर्शाता है।

 

डिजिटल और सतत ऊर्जा से लैस आधुनिक केंद्र

 

नंद घर केंद्रों में—

डिजिटल शिक्षण,

सोलर एनर्जी,

सुरक्षित ढाँचा,

पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएँ

लगातार जोड़ी जा रही हैं, ताकि ग्रामीण भारत में तकनीकी प्रगति का लाभ हर परिवार को मिल सके।

 

 

भविष्य की दिशा — 25,000 नंद घर का लक्ष्य

 

वेदांता आने वाले दो वर्षों में मात्र राजस्थान में 25,000 नंद घर स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। इससे 20 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। यह भारत में सार्वजनिक–निजी साझेदारी (PPP) का एक मजबूत मॉडल साबित हो सकता है।

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