बांकी मोंगरा। रेलवे साइडिंग से उड़ रही धूल और डस्ट प्रदूषण, खोलार नदी में स्टॉप डेम निर्माण नहीं होने तथा अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर पंखा दफाई एवं सूराकछार के रहवासियों ने सोमवार को बांकी मोंगरा-कोरबा मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पार्षद प्रेम कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हर वर्ष एसईसीएल द्वारा खोलार नदी में स्टॉप डेम बनाकर पानी का संरक्षण किया जाता रहा है, लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं किए जाने से क्षेत्र में जल संकट की आशंका बढ़ गई है। वहीं रेलवे साइडिंग से लगातार उड़ने वाली धूल के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आंदोलनकारियों ने प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखीं—
खोलार नदी में शीघ्र स्टॉप डेम का निर्माण कर पानी का संरक्षण किया जाए।
रेलवे साइडिंग से उड़ने वाली धूल और डस्ट प्रदूषण पर प्रभावी रोकथाम की जाए।
मुख्य मार्ग पर नियमित अंतराल में पानी का छिड़काव कराया जाए, ताकि धूल से लोगों को राहत मिल सके।
रेलवे द्वारा लगाए गए लोहे के ऊंचाई नियंत्रक (हाइट कंट्रोलर) के टूटे हुए हिस्से की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
सुबह 9 बजे से शुरू हुआ चक्का जाम दोपहर 1 बजे तक चला। करीब 4 घंटे तक मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित रही, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
बाद में दर्री तहसीलदार, बांकी मोंगरा थाना प्रभारी, रेलवे के अधिकारियों एवं एसईसीएल के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से चर्चा की और उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन दिया। अधिकारियों ने 17 तारीख तक समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया, जिसके बाद आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तय समयसीमा के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो भविष्य में फिर से बड़ा जनआंदोलन किया जा सकता है।
