सेमरदर्री में 8,300 स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण
प्रतिदिन 67 लाख 23 हजार लीटर भू-जल हो रहा रिचार्ज
वर्षा जल संरक्षण से भू-जल स्तर में सुधार की उम्मीद
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | 23 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से संचालित "मोर गाँव मोर पानी महाअभियान" जिले में प्रभावी परिणाम देता दिखाई दे रहा है। जल संकट से निपटने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में शुरू किया गया यह अभियान अब ग्रामीण क्षेत्रों में नई उम्मीद बनकर उभर रहा है। इसी कड़ी में जनपद पंचायत मरवाही अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरदर्री में किए गए कार्यों ने जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
ग्राम पंचायत सेमरदर्री के भाटा-टिकरा, शीतल गडहा एवं पथरा कोड़ी क्षेत्र में 8,300 स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच (Staggered Contour Trenches) का निर्माण कराया गया है। इन संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल को बहकर नष्ट होने से रोकना और उसे धीरे-धीरे भूमि में समाहित कर भू-जल स्तर को बढ़ाना है। वर्तमान मानसून के दौरान इन ट्रेंचों में वर्षा जल का प्रभावी संचयन हो रहा है, जिससे प्रतिदिन लगभग 67 लाख 23 हजार लीटर पानी भू-जल में रिचार्ज हो रहा है। यह उपलब्धि न केवल जिले बल्कि प्रदेश स्तर पर भी जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण मानी जा रही है।
वर्षा जल का बेहतर उपयोग, भू-जल स्तर में होगा सुधार
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्षा जल को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाए तो भविष्य में जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सेमरदर्री में बनाए गए स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच इसी दिशा में एक प्रभावी प्रयास हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा का पानी सीधे बहकर नदियों और नालों में जाने के बजाय धीरे-धीरे जमीन में समा रहा है, जिससे भू-जल स्तर में सुधार होने की संभावना बढ़ गई है।
इससे क्षेत्र के कुएं, हैंडपंप, बोरवेल और अन्य जल स्रोत लंबे समय तक जलयुक्त बने रहेंगे। साथ ही खेती के लिए आवश्यक नमी भी बनी रहेगी, जिससे किसानों को भविष्य में सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।
मिट्टी संरक्षण और हरियाली को मिलेगा बढ़ावा
जल संरक्षण के साथ-साथ यह अभियान मिट्टी संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। तेज बारिश के दौरान मिट्टी का कटाव कम होगा और उपजाऊ मिट्टी सुरक्षित रहेगी। इससे भूमि की उर्वरता बनी रहेगी तथा पौधों और वन क्षेत्र को पर्याप्त नमी मिलने से हरियाली में भी वृद्धि होगी।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे कार्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी सहायक होते हैं। भू-जल स्तर बढ़ने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है और वन्य जीवों के लिए भी जल उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
ग्रामीणों को मिला रोजगार, मजबूत हुई आजीविका
इस अभियान की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि जल संरक्षण कार्यों के साथ-साथ ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध कराया गया। निर्माण कार्य के दौरान प्रतिदिन 100 से 120 श्रमिकों ने कार्य किया। अब तक इस परियोजना के माध्यम से 8,078 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया जा चुका है।
इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और उन्हें अपने ही गांव में रोजगार मिलने से पलायन की आवश्यकता भी कम हुई है। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल को सकारात्मक बताते हुए इसे गांव के विकास और भविष्य की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना है।
जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बना रहा प्रशासन
जिला प्रशासन जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर इसे जनभागीदारी का अभियान बनाने पर विशेष जोर दे रहा है। विभिन्न ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण, जनजागरूकता कार्यक्रम तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रशासन का मानना है कि जल संरक्षण तभी सफल हो सकता है जब इसमें आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी हो। इसी उद्देश्य से ग्रामीणों को वर्षा जल संरक्षण, जल के विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
भविष्य के लिए मजबूत आधार
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी प्रकार जल संरक्षण के कार्य लगातार जारी रहे तो आने वाले वर्षों में जिले में भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा, पेयजल संकट कम होगा, पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
"मोर गाँव मोर पानी महाअभियान" केवल जल संरक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक दूरदर्शी पहल है। सेमरदर्री में किए गए कार्य इस बात का प्रमाण हैं कि योजनाबद्ध प्रयास, जनभागीदारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के बल पर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। यह पहल जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सतत ग्रामीण विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रही है।
