97 रन की जादुई पारी, संजू ने बदला मैच का रुख

टी20 विश्व कप के निर्णायक मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज संजू सैमसन ने ऐसी पारी खेली, जिसने न केवल मैच का रुख बदला बल्कि आलोचकों को भी जवाब दे दिया। ICC T20 World Cup के ‘करो या मरो’ मुकाबले में वेस्ट इंडीज के खिलाफ नाबाद 97 रन बनाकर उन्होंने टीम इंडिया को यादगार जीत दिलाई। इस शानदार प्रदर्शन के बाद टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने उनकी जमकर सराहना करते हुए उन्हें ‘वर्ल्ड क्लास’ खिलाड़ी करार दिया।

दबाव में दिखाई परिपक्वता

कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए इस अहम मुकाबले में भारत के सामने 196 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य था। बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए संजू सैमसन ने संयम, तकनीक और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। उन्होंने बिना घबराहट के पारी को अंत तक संभाला और टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया।

मैच के बाद कोच गंभीर ने कहा

“संजू एक वर्ल्ड क्लास प्लेयर हैं। रन चेज करते समय उन्होंने जिस समझदारी और धैर्य का परिचय दिया, वह काबिले-तारीफ है। उन्होंने कोई गैर-जरूरी शॉट नहीं खेला, हर गेंद को परिस्थिति के अनुसार खेला। बड़े मैचों में यही परिपक्वता काम आती है।”

आंकड़ों से ऊपर है परिस्थिति

गंभीर ने साफ कहा कि वे केवल आंकड़ों पर भरोसा नहीं करते। उनके अनुसार टी20 क्रिकेट मानसिक मजबूती और सही समय पर सही निर्णय लेने का खेल है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिम्बाब्वे के खिलाफ भले ही संजू बड़ा स्कोर नहीं बना पाए थे, लेकिन टीम की जरूरत के हिसाब से उन्होंने जिम्मेदारी निभाई थी।

टीम प्रयास से मिली जीत

कोच ने जीत का श्रेय पूरी टीम को दिया। उन्होंने बताया कि आखिरी ओवरों में शिवम दुबे के अहम चौके और तिलक वर्मा की उपयोगी पारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही। गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह की सटीक लाइन-लेंथ और पावरप्ले में अर्शदीप सिंह, हार्दिक पंड्या व अक्षर पटेल की कसी हुई गेंदबाजी ने मैच का आधार तैयार किया।

विरोधी कप्तान ने भी सराहा

वेस्ट इंडीज के कप्तान शाई होप ने भी संजू की बल्लेबाजी को ‘ए प्लस’ पारी बताया। उन्होंने कहा कि यह पारी इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि अनुभवी खिलाड़ी दबाव में कैसे मैच को नियंत्रित करता है।

भारत फिर सेमीफाइनल में

इस जीत के साथ भारत ने छठी बार टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। 2007 में एमएस धोनी की कप्तानी में खिताब जीतने के बाद टीम कई बार अंतिम चरण तक पहुंची है। हाल के वर्षों में टीम ने निरंतर अच्छा प्रदर्शन किया है और अब एक बार फिर खिताब की दावेदारी मजबूत कर दी है।

संजू सैमसन की यह पारी न केवल मैच जिताऊ साबित हुई, बल्कि यह संदेश भी दे गई कि बड़े मंच पर वही चमकता है, जो दबाव को अवसर में बदलना जानता हो।

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