आज के AI युग में कैसे करे कैरियर का निर्माण

AI के दौर में कैसे संवारे अपना भविष्य ?  डिग्री के साथ 'स्किल सेट' का तालमेल होना है जरूरी
कोरबा | बांकी मोंगरा


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब भविष्य की बात नहीं, बल्कि वर्तमान की हकीकत बन चुका है। जिस गति से ChatGPT, Gemini AI, Perplexity और अन्य AI टूल्स हमारे लाइफ स्टाइल के साथ हमारे काम करने के तरीके को बदल रहे हैं, उसने करियर निर्माण के पुराने हो चले पारंपरिक तरीकों पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब बड़ा सवाल यह नहीं है कि आप क्या पढ़ रहे हैं, बल्कि यह है कि आप तकनीक के साथ कितनी जल्दी खुद को ढाल रहे हैं। यह तो सभी जानते है की आज के तेजी से बदलते तकनीकी युग (AI Era) में करियर की प्रतिस्पर्धा केवल कॉलेज की डिग्री तक सीमित नहीं रह गई है। विषशज्ञों का मानना है कि भविष्य की चुनौतियों के लिए छात्रों को अब स्कूल स्तर, विशेषकर कक्षा 9वीं से ही तैयार करना होगा। इसी विषय में Rise Computer College' के संस्थापक और डायरेक्टर सुनील विश्वकर्मा ने शिक्षा के आधुनिक ढांचे पर जोर देते हुए महत्वपूर्ण इनपुट साझा किए हैं।

कक्षा 9वीं: करियर की तैयारी का 'टर्निंग पॉइंट'

Example Imageसुनील विश्वकर्मा के अनुसार, 9वीं कक्षा वह समय होता है जब छात्र के सीखने की क्षमता और जिज्ञासा अपने चरम पर होती है। यदि इसी समय उन्हें स्पोकन इंग्लिश और कंप्यूटर फाउंडेशन जैसे विषयों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाए, तो वे भविष्य में किसी भी प्रोफेशनल कोर्स या नौकरी के लिए दूसरों से कई कदम आगे रहेंगे।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल किताबी ज्ञान अब पर्याप्त नहीं रह गया है; व्यावहारिक कौशल (Practical Skills) ही आज की असली निवेश है। दुनिया तेजी से बदल रही है। बड़े महानगरों में तो स्कूल, कॉलेज ने छात्रों को AI और डिजिटल क्रांति को अनिवार्य कर दिया गया है जिसका उन्हें बहुत अच्छा परिणाम मिल भी रहा है। लेकिन छत्तीसगढ़ जैसे पिछड़े प्रदेश में जहां बेसिक शिक्षा का ढांचा ही कमजोर है और डिजिटल क्रांति केवल इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब के कंटेंट यूजर्स तक ही सीमित है। आज हम देखते हैं की  जिस समय हमारे छात्र अपनी स्कूल की पढ़ाई कर रहे होते हैं, ठीक उसी समय दुनिया के टॉप प्रोफेशनल्स AI और डिजिटल टूल्स का उपयोग कर करियर की नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या हमारा पारंपरिक एजुकेशन सिस्टम छात्रों को आने वाले 'कल' के लिए तैयार कर पा रहा है?

 करियर निर्माण के बदलते मापदंड

  1. Example Image
    विशेषज्ञों का मानना है कि AI उन कामों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है जो दोहराव (Repetitive) वाले हैं। ऐसे में करियर निर्माण के लिए अब 3-S' मॉडल पर ध्यान देना अनिवार्य हो गया है: Skill, Speed और Strategy
    सफलता के पांच मूल मंत्र
    1. अर्ली स्टार्ट (Early Start): अब करियर की सोच कॉलेज के बाद नहीं, बल्कि स्कूल स्तर से होनी चाहिए। कक्षा 9वीं से ही छात्रों को कोडिंग, डिजिटल लिटरेसी और स्पोकन इंग्लिश जैसे विषयों में महारत हासिल करनी चाहिए।
    2. डिजिटल फाउंडेशन है अनिवार्य:
    आज कंप्यूटर की बेसिक जानकारी होना उतना ही जरूरी है जितना कि साक्षर होना। **Rise Skills College** के डायरेक्टर **सुनील विश्वकर्मा** के अनुसार, "कंप्यूटर और AI टूल्स की समझ अब एक विकल्प नहीं बल्कि जरूरत है। जो छात्र समय रहते इन तकनीकी कौशलों को नहीं अपनाएंगे, वे ग्लोबल मार्केट में पीछे छूट जाएंगे।"
    3. कम्युनिकेशन स्किल्स की बढ़ती अहमियत:
    जैसे-जैसे मशीनें तकनीकी काम संभाल रही हैं, इंसानी संवाद (Human Communication) की कीमत बढ़ गई है। अच्छी अंग्रेजी बोलना और प्रभावी ढंग से अपनी बात रखना (Spoken English) अब किसी भी लीडरशिप रोल के लिए पहली शर्त है।
    4. हाइब्रिड लर्निंग अपनाएं:
    सिर्फ किताबी ज्ञान पर निर्भर न रहें। ऑनलाइन कोर्स, वर्कशॉप और प्रैक्टिकल इंटर्नशिप के जरिए खुद को अपडेट रखें। भविष्य उनका है जो निरंतर सीखने (Continuous Learning) के लिए तैयार हैं।
    5. क्रिटिकल थिंकिंग और क्रिएटिविटी:
    AI डेटा प्रोसेस कर सकता है, लेकिन वह मौलिक सोच और भावनात्मक समझ (Emotional Intelligence) में इंसान की बराबरी नहीं कर सकता। अपनी रचनात्मकता और निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करें।

​करियर की नींव: 9वीं क्लास ही क्यों?
​कक्षा 9वीं वह पड़ाव है जहाँ से छात्र अपने भविष्य के लक्ष्यों को आकार देना शुरू करते हैं। इस उम्र में सीखी गई स्किल्स जीवन भर उनके आत्मविश्वास और प्रोफेशनल ग्रोथ का आधार बनती हैं।

स्किल्स ही असली सुरक्षा है।
शिक्षा और कैरियर निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का तर्क है कि भारत की बड़ी युवा आबादी को 'एम्प्लॉयबल' (रोजगार योग्य) बनाने के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग पर जोर देना होगा। सुनील विश्वकर्मा का कहना है कि, हमें शिक्षा पद्धति को इस तरह विकसित करना होगा जहाँ छात्र केवल डिग्री लेकर न निकलें, बल्कि उनके हाथ में एक ऐसा हुनर हो जिसे कोई मशीन रिप्लेस न कर सके।

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