नेवता–जूनापानी सड़क निर्माण में बड़ा खेल! बिना फॉरेस्ट क्लीयरेंस 50 से अधिक पेड़ कटे, विभागों की भूमिका संदिग्ध

कोंडागांव, 18 फरवरी 2026 | ग्राम नेवता से जूनापानी तक लगभग साढ़े चार किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग (PWD) कोंडागांव द्वारा कराया जा रहा है। जन सूचना पटल के अनुसार इस कार्य की शुरुआत 15 जुलाई 2025 को हुई थी और पांच माह के भीतर यानी दिसंबर 2025 तक सड़क निर्माण पूर्ण होना था, लेकिन फरवरी 2026 तक भी कार्य अधूरा पड़ा है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि तय समय-सीमा का खुला उल्लंघन तो हुआ ही है, साथ ही सड़क निर्माण के नाम पर पर्यावरणीय नियमों की भी गंभीर अनदेखी की गई। ग्रामीणों के अनुसार 50 से अधिक पेड़ों की बेतरतीब कटाई कर दी गई, कई पेड़ों को जला भी दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।

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मामले में मुलमुला वन परिक्षेत्र अधिकारी धीरेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि इस सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से कोई एनओसी/फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं ली गई थी। पेड़ों की कटाई के लिए भी विभाग से किसी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई थी और न ही वन परिक्षेत्र मूलमुला से कोई पत्राचार हुआ। बिना अनुमति कटे पेड़ों की लकड़ी को डिपो में जमा कराया जा रहा है और अग्रिम कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

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वहीं PWD कोंडागांव के सब इंजीनियर प्रमोद नेताम का कहना है कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब फॉरेस्ट क्लीयरेंस थी ही नहीं, तो निर्माण कार्य शुरू कैसे हुआ? और जब वन विभाग ने कार्रवाई की, तभी काम क्यों रोका गया?

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ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निर्माण कार्य बंद होने के बावजूद ठेकेदार द्वारा फॉरेस्ट लैंड के आसपास अर्थवर्क के लिए मिट्टी-मुरूम की खुदाई लगातार जारी है, वह भी बिना किसी वैध अनुमति के।

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खनिज विभाग कोंडागांव से जानकारी लेने पर सहायक खनिज अधिकारी गौतम नेताम ने संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि फील्ड निरीक्षण नहीं हो पाता, इसलिए मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बिल पास कराने या माइनिंग क्लीयरेंस के लिए ठेकेदार को विभाग के पास आना ही पड़ेगा, तब स्थिति स्पष्ट होगी।

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अब जिला प्रशासन पर टिकी निगाहें

 

पूरे मामले में ठेकेदार की गंभीर लापरवाही और PWD, वन विभाग व खनिज विभाग की आपसी समन्वयहीनता उजागर होती दिख रही है। बिना फॉरेस्ट क्लीयरेंस कार्य शुरू होना, अवैध पेड़ कटाई, और खनिज विभाग की अनभिज्ञता—तीनों विभागों की भूमिका पर सवाल खड़े हो चुके हैं।

 

सूत्रों के अनुसार अब जिला प्रशासन इस प्रकरण पर सख्त रुख अपना सकता है। संभावित कार्रवाई में शामिल हो सकते हैं:

 

अवैध पेड़ कटाई और खुदाई पर एफआईआर दर्ज करना,

 

संबंधित ठेकेदार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) लगाना,

 

बिना अनुमति कार्य प्रारंभ करने वाले अधिकारियों पर विभागीय जांच,

 

कार्य की तकनीकी व प्रशासनिक जांच समिति गठित कर पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा,

 

अवैध खुदाई व मुरूम परिवहन पर खनिज अधिनियम के तहत कार्रवाई।

 

 

ग्रामीणों की मांग है कि केवल दिखावटी कार्रवाई नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर ठोस कानूनी कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में बिना क्लीयरेंस ऐसे कार्य दोबारा न हों और पर्यावरणीय कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके।

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