उद्यानिकी महाविद्यालय स्थानांतरण पर बवाल, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा बदरौडी- देवगवां से हटाना बर्दाश्त नहीं

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया विस्तृत ज्ञापन, निजी स्वार्थों के चलते फैसले बदलने का आरोप; आंदोलन की खुली चेतावनी

मरवाही / प्रयास कैवर्त 

जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में प्रस्तावित शासकीय उद्यानिकी महाविद्यालय को लेकर अब बड़ा जनआंदोलन खड़ा होने की स्थिति बनती जा रही है। बदरौडी देवगवां सहित आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए महाविद्यालय के प्रस्तावित स्थल को बदलने की कोशिशों का कड़ा विरोध किया है। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि महाविद्यालय को बदरौडी देवगवां अन्यत्र स्थानांतरित किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने विस्तार से बताया है कि लगभग तीन वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मरवाही क्षेत्र में उद्यानिकी महाविद्यालय खोलने की स्वीकृति दी गई थी। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना के लिए करीब 100 एकड़ भूमि की आवश्यकता तय की गई थी। शासन के निर्देशानुसार राजस्व विभाग ने जमीन की तलाश कर ग्राम पंचायत बदरौडी के आश्रित ग्राम देवगवां में लगभग 80 एकड़ उपयुक्त भूमि चिन्हित की, जो हर दृष्टिकोण से महाविद्यालय स्थापना के लिए आदर्श मानी गई।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित स्थल न केवल भौगोलिक दृष्टि से विकासखंड मरवाही के केंद्र में स्थित है, बल्कि यहां सड़क, पानी, पहुंच मार्ग सहित सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस स्थान पर महाविद्यालय स्थापित होने से क्षेत्र के आधे से अधिक गांवों के विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। इतना ही नहीं, छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास निर्माण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शासन स्तर पर इस स्थान को अंतिम रूप दिया जा चुका था।

हालांकि, ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कुछ प्रभावशाली और स्वार्थी तत्व अपने निजी हितों को साधने के लिए इस महाविद्यालय को मरवाही स्थानांतरित कराने का दबाव बना रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि मरवाही में न तो पर्याप्त राजस्व भूमि उपलब्ध है और न ही वह स्थान वर्तमान प्रस्तावित स्थल की तुलना में उपयुक्त है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर फैसले को बदलने की कोशिशें की जा रही हैं, जिसे ग्रामीणों ने पूरी तरह जनविरोधी और अन्यायपूर्ण करार दिया है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रशासन स्वयं कई बार इस प्रस्तावित स्थल को उपयुक्त बता चुका है, लेकिन अब कुछ लोगों के दबाव में आकर निर्णय बदलने की कोशिश हो रही है। इससे न केवल हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा महाविद्यालय को बदरौडी -देवगवां में ही स्थापित करने के आदेश जारी किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो वे सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस मुद्दे ने अब जिले में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। 

आम जनता से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, सभी की नजर अब शासन के फैसले पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, यदि समय रहते संतुलित और जनहित में निर्णय नहीं लिया गया तो एक बार जनहित को लेकर बड़ा जन आंदोलन देखने को मिलेगा,

 

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