कोरबा। जनता द्वारा चुने गए जनपद पंचायत सदस्यों ने अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सोमवार को जनपद पंचायत कोरबा की सामान्य सभा का सामूहिक रूप से बहिष्कार कर दिया। सदस्यों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए उन्हें न तो डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) मद से कोई फंड दिया जा रहा है और न ही ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना बनाने में उनसे कोई सलाह ली जा रही है।
सोमवार को जनपद पंचायत कोरबा में सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही जनपद सदस्यों ने एकजुट होकर इसका बहिष्कार कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
सदस्यों ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत सदस्यों को विकास कार्यों के लिए डीएमएफ फंड जारी किया जाता है, जबकि जनपद पंचायत सदस्यों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इसके कारण वे अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं।
सदस्यों ने कहा कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्रामीण उनसे विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर मिलते हैं, लेकिन फंड की कमी के कारण वे कोई कार्य नहीं करा पाते। इससे उन्हें ग्रामीणों के बीच असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है और कई बार अपमान भी झेलना पड़ता है।
इस संबंध में जनपद सदस्यों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि जिला खनिज न्यास मद से जनपद सदस्यों की अनुशंसा पर भी विकास कार्यों की स्वीकृति दी जाए, ताकि वे अपने क्षेत्र में जरूरी कार्य करा सकें।
सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार विकास कार्यों के भूमि पूजन कार्यक्रम में भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाता, जो निर्वाचित प्रतिनिधियों की उपेक्षा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों और समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक वे सामान्य सभा का बहिष्कार जारी रखेंगे।
इस दौरान गायत्री मंझवार, आनंद राम मंझवार, अंबिका बाई, रफीक मेमन, डोलेश्वरी राठिया, बलेन्द्र सिंह राठिया, फलमति राठिया, गंगोत्री कंवर, महेन्द्र सिंह, उषा देवी कुर्रे, मोहन बाई धिरहे, नंद कुमार कंवर, भूपेन्द्र कंवर, किशन कोशले, चंद्रकांता राजपूत और अनिल खुंटे सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
