मौत से आँख मिचौली, ‘अभी’ में जीने की अंतिम हुंकार

मौत से पहले का तांडव

 

भ्रम का प्रहार

यह जो कैलेंडर की तारीखों पर तूने सपने टांग रखे हैं,

किसने कहा कि यह 'कल' का सूरज तेरे लिए ही उगेगा?

तेरी कलाई पर बंधी घड़ी टिक-टिक नहीं कर रही,

वह तेरे बचे हुए समय की उल्टी गिनती गिन रही है।

हर पल जो तूने 'सोचने' में, 'डरने' में, 'रुकने' में बिताया,

वह मौत के खाते में, तूने मुफ्त में जमा कराया।

"अभी वक्त नहीं है"—यह कायनात का सबसे बड़ा झूठ है,

तेरी अर्थी सजने में, बस एक धड़कन की ही तो छूट है।

 

 मुखौटों का दहन

उतार फेंक यह शराफत का, मर्यादा का, संकोच का लबादा,

श्मशान की आग में कोई नहीं पूछेगा तेरा ओहदा क्या था, तेरा वादा क्या था।

जिन लोगों के ताानों से तू अपने कदम रोक लेता है,

तेरी चिता जलते ही, वो अपनी रोटियां सेकने लगेंगे।

तू चीख, तू गा, तू नाच, तू पागलों सा प्यार कर,

मर्यादाओं की लकीरें, लाशें नहीं लांघा करतीं, ज़िंदा लोग लांघते हैं!

अगर आज रात तेरा दिल हमेशा के लिए खामोश होना है,

तो क्या अब भी तुझे उस पुराने झगड़े का अफसोस ढोना है?

जा, और अभी उस 'ईगो' के पहाड़ को चकनाचूर कर दे,

या तो माफ़ी मांग ले, या माफ़ करके किस्सा दूर कर दे।

 

बारूद सी ज़िंदगी

साँस लेना ज़िंदा रहने का सबूत नहीं है मेरे दोस्त,

लाशें भी तो तैरती हैं पानी में, मगर वो बहती नहीं हैं।

जिंदगी को ऐसे पी जा, जैसे रेगिस्तान की प्यास हो,

तेरे हर कर्म में, एक तूफ़ानी प्रयास हो।

काम वो कर कि तेरा पसीना, इत्र से ज्यादा महके,

तेरी आँखों में नींद नहीं, एक जूनून सा दहके।

सुरक्षित रास्तों पर तो कायरों की टोलियां चलती हैं,

इतिहास की मशालें तो, तूफानों में ही जलती हैं।

 

 मौत से आँख मिचौली

सुनो! मृत्यु कोई अंत नहीं, वह तो बस एक पूर्णविराम है,

लेकिन अधूरी कहानी पर विराम लगना, लेखक का अपमान है।

तुझे ऐसे जीना है कि जब यमराज तेरा हाथ थामने आए,

तो उसे तेरे हाथ की लकीरें घिसी हुई मिलें।

वह देखे कि तूने अपनी किस्मत को बचाकर नहीं रखा,

बल्कि उसे आखिरी बूँद तक निचोड़ लिया है।

तेरा शरीर भले ही नश्वरता की राख बन जाए,

मगर तेरी रूह की आग, सितारों में भी नजर आए।

 

अंतिम हुंकार

तो उठ! और अपनी नसों में बिजली दौड़ जाने दे,

आज के इस दिन को, अपना युग बन जाने दे।

न भूत का रोना, न भविष्य का डर,

बस 'अभी' और 'यहीं' - यही है तेरा घर।

 

यह आखिरी दिन है - मान ले, जान ले, ठान ले!

अब इस बचे हुए वक्त में, अपनी औकात पहचान ले।

मरना तो तय है, उसमें कोई कमाल नहीं,

मगर ऐसे जियो कि मौत को भी लगे, "इसे मिटाना आसान नहीं!