आज साल का पहला सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं रहेगा सूतक काल, जानें क्या हैं नियम

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज मंगलवार को लगने जा रहा है। ग्रहण को लेकर देशभर में लोगों के मन में कई सवाल हैं—क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा? क्या इसका सूतक काल मान्य होगा? और यदि होगा तो उसका समय क्या रहेगा? आइए जानते हैं इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

भारत में नहीं माना जाएगा सूतक काल

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 17 फरवरी को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। शास्त्रों के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दृश्य नहीं होता, वहां उसका सूतक काल भी मान्य नहीं होता। इसलिए भारत में इस सूर्य ग्रहण का सूतक नहीं रहेगा और मंदिरों के पट बंद करने या अन्य धार्मिक प्रतिबंधों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

हालांकि जिन देशों में यह सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, वहां स्थानीय समय के अनुसार सूतक काल प्रभावी रहेगा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमों का पालन किया जाएगा।

क्या होता है सूतक काल?

धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। इसे अशुभ समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्य, यात्रा या नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए।

सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। साथ ही भोजन पकाने और खाने से भी परहेज करने की परंपरा रही है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक खगोलीय घटना है और इसका सीधा दुष्प्रभाव सिद्ध नहीं है।

धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक दृष्टि

भारत में सूर्य ग्रहण को धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व के साथ देखा जाता है। वहीं वैज्ञानिक इसे सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की विशेष स्थिति से जुड़ी एक प्राकृतिक खगोलीय घटना मानते हैं।

कुल मिलाकर, आज का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल प्रभावी नहीं रहेगा। श्रद्धालु सामान्य दिनचर्या का पालन कर सकते हैं।

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