राजनांदगांव:- श्रम आयुक्त दर वन कर्मचारी संघ प्रमुख हारुन मानिकपुरी ने छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी से मांग करते हुए कहा है कि 23 फरवरी से शुरू हो रहे षष्ठम विधानसभा के आठवें बजट सत्र में संविदा कर्मचारी, अनियमित कर्मचारी, श्रम आयुक्त दर मासिक श्रमिकों के उत्थान के लिए बजट में पीएफ का लाभ सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। इसके तहत वेतन सीमा वर्तमान से बढ़ाकर 25,000 या इससे अधिक किया जाना अतिआवश्यक है। जिससे अधिक से अधिक संविदा कर्मचारी, अनियमित कर्मचारी, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी, श्रम आयुक्त दर मासिक श्रमिक अनिवार्य पीएफ और पेंशन के दायरे में आ सकें। साथ ही कर छूट की सीमा बढ़नी चाहिए और सरलीकृत प्रक्रिया होनी चाहिए। ईपीएफओ नियमों के तहत वर्तमान वैधानिक वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 प्रति माह या इससे अधिक किया जाना चाहिए। इससे उच्च वेतन वाले दैनिक श्रमिक भी भविष्य निधि के दायरे में आ सकेंगे। हारुन मानिकपुरी ने बताया कि सभी छोटे बड़े इकाइयों में काम करने वाले दैनिक वेतन भोगियों और श्रम आयुक्त दर श्रमिकों के लिए 12%कर्मचारी नियोक्ता अंशदान अनिवार्य हो जिससे 8.33% पैंशन (EPS -95) में जाए। पीएफ पर अंशदान पर कर छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि बचत पर ब्याज कर योग्य न हो। आपातकालीन स्थिति या नौकरी छूटने पर पीएफ की अधिक निकासी के लिए प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाना चाहिए। यह कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग को बढ़ाता है चिकित्सा व्यय या अन्य आपातकालीन जरुरतों के लिए सुरक्षित धन प्रदान करता हैं, और एक सैवानिवृत्ती के बाद वित्तीय स्थिरता देगा। साथ ही हारुन मानिकपुरी ने कहा है कि केन्द्र सरकार 4नए श्रम कानून अप्रैल 2026 से लागू होते ही यह 1948 का कानून समाप्त हो जाएगा। जिससे स्थाईकरण योजना अप्रैल 2026 के बाद लागू करने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, और अनुबंध के कर्मचारी रह जाने का खतरा मंडराता नजर आ रहा है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2016 और 2023 में औद्योगिक अधिनियम अंतर्गत 1948 की धारा 61व63 के माध्यम से स्थाईकरण योजना लागू की गई थी। इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी एक वर्ष समय सीमा तय कर स्थाईकरण योजना लागू करने की मांग प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री बिष्णुदेव साय, वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी से की
