बजट में स्वास्थ्य कर्मियों को झटका, NHM संघ ने उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत बजट की थीम “ज्ञान के उत्थान, गति की शक्ति से, संकल्प के साथ आगे बढ़ते हुए..” को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी संघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संघ का आरोप है कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले संविदा कर्मचारियों की मांगों की बजट में पूर्णतः उपेक्षा की गई है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरि और रायगढ़ जिलाध्यक्ष सुश्री शकुंतला एक्का ने कहा कि बजट की थीम आकर्षक जरूर है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। उन्होंने कहा कि हजारों NHM कर्मचारी वर्षों से सीमित वेतन और अस्थिर सेवा शर्तों के बीच काम कर रहे हैं, बावजूद इसके उनके लिए कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।

संघ के प्रांतीय प्रवक्ता पूरन दास ने कहा कि कोविड काल सहित हर कठिन परिस्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं को संभालने वाले कर्मचारियों को केवल आश्वासन मिला है, ठोस निर्णय नहीं। उनका कहना है कि यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने वाली है।

प्रांतीय महासचिव कौशलेस तिवारी ने सरकार को पूर्व में किए गए वादों की याद दिलाते हुए कहा कि संविदा कर्मचारियों के लिए चिकित्सा बीमा, ग्रेड पे, एचआर पॉलिसी में सुधार और अनुकम्पा नियुक्ति जैसे मुद्दों पर समयबद्ध निर्णय का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बजट में इसका उल्लेख नहीं है।

प्रमुख मांगें

NHM कर्मचारी संघ ने सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा है कि—

संविदा कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नियमितीकरण नीति बनाई जाए।

ग्रेड पे, एचआर पॉलिसी और चिकित्सा बीमा संबंधी घोषणाओं को तत्काल लागू किया जाए।

17,500 कार्यरत कर्मचारियों को सेवा स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।

संघ ने सरकार से सीधा प्रश्न किया है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने का संकल्प है, तो उन 17,500 कर्मचारियों की अनदेखी क्यों की जा रही है जो इस व्यवस्था की आधारशिला हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक और न्यायपूर्ण निर्णय लेगी।

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