बिना नींव के पानी में तैरता शिव मंदिर, 4 महीने जल समाधि में रहता है शिवलिंग
निनोर बस स्टैंड पर प्राचीन दर्शनीय नैनसुख तालाब स्थित है। निनौर के शिक्षक हेमंत सेन ने बताया की उतर महाभारत कालीन नैनावती नगरी(निनोर) के लिए प्रमुख जल स्त्रोत था।तालाब ने काले पत्थरों से बने प्राचीन घाट भी दर्शनीय है।
तालाब कई एतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है। तालाब की पाल पर रतलाम नगर के संस्थापक महाराजा रतन सिंह राठौर की धरमत के युद्ध1658 में वीरगति के बाद रतन सिंह राठौर की रानियों ने तालाब की पाल पर सतीत्व का पालन किया जिनका स्मारक(छतरी) बनी हुई है।तालाब के बीच में बिना नीव का शिव मंदिर स्थित है ,
जिसके बारे में किवदंती है की यह शिव मंदिर 17वी सदी में किसी जत्री द्वारा उत्तरभारत से उड़ाकर लाया गया है।बारिश में तालाब भर जाता है तब शिवलिंग चार महीने जल समाधि में चला जाता है,
तालाब की पाल पर प्राचीन नवग्रह मंदिर,हनुमान मंदिर,कई कुलदेवताओ के छोटे छोटे मंदिर स्थित है।तालाब में वर्षभर कमल पुष्प खिले रहते है
जो पर्यटकों को आकर्षित करते है तालाब में हजारों देशी और प्रवासी पक्षियों की अठखेलियां सेलानियो के लिए तालाब को रमणीय स्थल बनाती है।
