बूचाटोला में मनाया गया बलिदान दिवस

 

छुरिया:गत 25 जून को आदिवासी कोयतुर गोंड़ समाज ग्राम इकाई बूचाटोला के तत्वावधान में छुरिया विकास खंड के आदिवासी बाहुल्य वनांचल ग्राम बूचाटोला के गोंड़ पारा में स्थित गोंड़वाना भवन प्रांगण में गोंड़वाना वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि कोयतुर गोंड़ समाज के ब्लाक प्रवक्ता दिलीप कोरेटी रहे,अध्यक्षता स्थानीय ग्रामप्रबंधक चन्द्रभान दर्रो ने किया। विशेष अतिथि सर्कल उपाध्यक्ष अनिल हारमें,महिला प्रभाग के सर्कल सचिव समेबाई तुलावी,वरिष्ठ समाजिक कार्यकर्ता सोनसाय कल्लो, इन्द्रु तुलावी एवं कुमलाल कल्लो रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ रानी दुर्गावती के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सेवा अर्जी के साथ हुआ पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया।सभा को संबोधित करते हुए मुख्यअतिथि दिलीप कोरेटी ने कहा कि रानी दुर्गावती नारी शौर्यता की प्रतीक है।हर भारतीय नारी को रानी दुर्गावती को अपना आदर्श मानकर अन्याय, अत्याचार एवं शोषण के खिलाफ संघर्ष करना चाहिए। आजकल आदिवासी समाज की महिलाओं के साथ ज्यादती बढ़ गयी है। पीड़ीत आदिवासी महिलाओं को रानी दुर्गावती के पदचिन्हों पर चलकर ज्यादतियों का विरोध करना चाहिए।श्री कोरेटी ने महिलाओं को रानी दुर्गावती की तरह अपने घर -परिवार,समाज एवं सत्ता के संचालन में अग्रणी भूमिका निभाने का आव्हान किया। अध्यक्ष की आसंदी से चन्द्रभान दर्रो ने कहा कि कोयतुर गोंड़ समाज एवं समाज की मूल संस्कृति संक्रमण काल की दौर से गुजर रही है। ऐसे स्थिति में कोयतुर गोंड़ समाज के लोगों को सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता को बनाये रखने की आवश्यकता है। अलगाववादी विचारधारा के लोग कोयतुर गोंड़ समाज को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हमें ऐसे ताकतों से सावधान रहकर अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता को बनाये रखना है।सभा को संबोधित कर अनिल हारमें,समेबाई तुलावी,कुमलाल कल्लो, इन्द्रु तुलावी,सोनसाय कल्लो,चन्द्रकुमार दर्रो,सुहाता हारमें एवं भावना कोरेटी ने उपस्थित लोगों को रानी दुर्गावती के आदर्शों को आत्मसात करने का आव्हान किया। स्वागत भाषण चन्द्रकुमार दर्रो, सफल संचालन रूपेश कल्लो एवं आभार प्रदर्शन सुरेन्द्र कोला ने किया।युवा-युवती एवं महिलाओं का गोंड़ी पोशाक विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा।

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      इस अवसर पर प्रमुख रूप से धनसाय नेताम,छबिलाल हारमें,मुनका तुलावी, गनील हारमें,राजू नेताम,मीना हारमें,सीता नेताम,हठियारिन तुलावी,मेहतरीन हारमें,सुमित्रा सलामें,सिरमो बाई कोरेटी,सुमन कोरेटी, मेहतरू सलामें, नवलसिंह कुंजाम,डारन बाई कुंजाम,रूपनाथ हारमें, लीला सलामें,पल्टीन सलामें, खुमन सलामें,परसादी नुरूटी,प्रेमजीत कोरेटी,बसंती दर्रो,संजय कुमार नेताम,ओमप्रकाश सलामें,खुलेश्वर सलामें,निराशा नेताम,हरीश नेताम,सत्यवती सलामें,निराशा कल्लो,फुलेश्वरी कुंजाम,समोतीन सलामें,तामेश्वरी नेताम,पुनई कोरेटी,प्रेमबाई कोला,भावेश्वरी हारमें,लीला दर्रो, नीलिमा नेताम,तनिश सलामें,केशर सलामें,संतारो सलामें,प्राची सलामें आदि सहित आदिवासी कोयतुर गोंड़ समाज के लोग सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित थे।

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